सीकर। राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व सर्वे को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारियों पर स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा है कि सर्वे की प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक, पारदर्शी और विश्वसनीय है तथा इसे माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है।
आयोग के सचिव (सलाहकार) अशोक कुमार जैन ने बताया कि सर्वे की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ आधारहीन सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं, जिनसे आमजन में भ्रम और आशंकाएं पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।
केवल अधिकृत प्रगणक ही करेंगे डेटा दर्ज
आयोग ने स्पष्ट किया कि सर्वे के लिए डेटा फीडिंग का कार्य केवल अधिकृत प्रगणकों द्वारा ही किया जा रहा है। प्रगणकों को मतदाता सूची और ओबीसी की अधिसूचित जातियों की सूची के आधार पर प्रत्येक परिवार का सत्यापन कर सही जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग के अनुसार, इससे सर्वे में दर्ज होने वाली जानकारी की प्रमाणिकता सुनिश्चित की जा रही है।
‘सिटीजन’ विकल्प को लेकर भी दी सफाई
आयोग ने बताया कि पोर्टल पर उपलब्ध ‘सिटीजन’ विकल्प आम नागरिकों द्वारा स्वतंत्र रूप से डेटा दर्ज करने के लिए उपलब्ध नहीं है। इसे केवल तकनीकी और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रखा गया है।
यदि किसी अनधिकृत मोबाइल नंबर से कोई जानकारी सिस्टम में दर्ज होती है, तो तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से उसकी जांच कर उसे हटाया जा सकता है। अंतिम डाटाबेस में केवल एसएसओ आईडी से प्रमाणित और अधिकृत प्रगणकों द्वारा सत्यापित डेटा ही शामिल किया जाएगा।
कई स्रोतों के आधार पर तैयार होगी रिपोर्ट
आयोग ने बताया कि अनुशंसा रिपोर्ट केवल मौजूदा सर्वे पर आधारित नहीं होगी। रिपोर्ट तैयार करते समय जनआधार डाटाबेस, वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जनसंख्या वृद्धि का अनुमान, निर्वाचन आयोग के मतदाता आंकड़े तथा अन्य आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी का भी समग्र विश्लेषण किया जाएगा।
आयोग ने कहा कि यह दावा पूरी तरह निराधार है कि कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से डेटा दर्ज कर सर्वे प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। आयोग ने भरोसा दिलाया कि सर्वे निष्पक्ष, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से पूरा किया जा रहा है।





