सीकर। राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने रविवार को स्वास्थ्य भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर में संचालित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO), जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारियों (RCHO) तथा मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रत्येक उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाली गर्भवती महिला की नामवार सूची तैयार कर उसे संबंधित एएनएम और सीएचओ से मैप किया जाए, ताकि उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित हो सके। आवश्यकता पड़ने पर समय पर रेफरल सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।
प्रसव के बाद 24 घंटे तक गहन निगरानी के निर्देश
मुख्य सचिव ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में प्रसव और अन्य ऑपरेशन के लिए निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का सख्ती से पालन किया जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि प्रसव के बाद कम से कम अगले 24 घंटे तक धात्री महिला की गहन निगरानी की जाए और उसके पोषण का विशेष ध्यान रखा जाए। बैठक के दौरान लेबर रूम प्रोटोकॉल, संक्रमण नियंत्रण, एनेस्थीसिया, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, कोल्ड चेन मैनेजमेंट तथा रेफरल प्रोटोकॉल पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की नियमित मॉनिटरिंग पर जोर
मुख्य सचिव ने बताया कि चिकित्सा विभाग के अभियान के दौरान जुलाई माह में सीकर, नागौर, जालौर, बांसवाड़ा और चूरू में सबसे अधिक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई है।
उन्होंने निर्देश दिए कि गंभीर एनीमिया से पीड़ित तथा जिन गर्भवती महिलाओं की ड्यू डेट निकट है, उन्हें आवश्यकता के अनुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन, एफसीएम इंजेक्शन अथवा आयरन सुक्रोज थेरेपी उपलब्ध कराई जाए, ताकि सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सके।
इसके साथ ही 6 ग्राम या उससे कम हीमोग्लोबिन वाली तथा अन्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की सूची एएनएम, आरसीएचओ और सीएमएचओ स्तर पर उपलब्ध रखने तथा संबंधित एएनएम द्वारा प्रत्येक तीसरे दिन स्वास्थ्य जांच करने के निर्देश दिए गए।
सुरक्षित प्रसव की पूर्व योजना बनाने पर जोर
प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने कहा कि सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए पहले से प्रसव योजना तैयार करना आवश्यक है। इसमें गर्भवती महिला की स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप अस्पताल का चयन, संभावित प्रसव तिथि और रेफरल व्यवस्था का समुचित प्रबंधन शामिल होना चाहिए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला के ममता कार्ड में सभी आवश्यक जानकारियां स्पष्ट और पूर्ण रूप से दर्ज की जाएं।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में आयुक्त चिकित्सा शिक्षा बाबूलाल गोयल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी, जनस्वास्थ्य निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, अतिरिक्त मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. टी. शुभमंगला, आरसीएच निदेशक डॉ. मधु रतेश्वर सहित चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।






