सीकर, राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने प्रदेश में चल रहे OBC सर्वे को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से प्रसारित हो रही भ्रामक सूचनाओं पर स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा है कि सर्वे की पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित है तथा आमजन किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें।
आयोग के अनुसार सर्वे कार्य उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कराया जा रहा है। इसके लिए केवल अधिकृत प्रगणकों को ही डेटा संग्रह और फीडिंग की जिम्मेदारी दी गई है।
केवल अधिकृत प्रगणक ही करेंगे डेटा दर्ज
आयोग ने बताया कि सर्वे के दौरान प्रगणकों को मतदाता सूची और ओबीसी की अधिसूचित जातियों की सूची उपलब्ध कराई गई है, ताकि पात्र परिवारों की सही पहचान और सत्यापन के बाद ही जानकारी दर्ज की जा सके।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि पोर्टल पर दिखाई देने वाला ‘सिटीजन’ विकल्प आम नागरिकों द्वारा स्वयं जानकारी भरने के लिए उपलब्ध नहीं है। यह केवल तकनीकी और प्रशासनिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए रखा गया है, ताकि प्रगणकों की ड्यूटी में बदलाव या समयबद्ध सर्वे कार्य के दौरान आवश्यकता पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सके।
तकनीकी जांच के बाद ही होगा अंतिम डेटा शामिल
आयोग के अनुसार अनधिकृत मोबाइल नंबर या अन्य माध्यम से प्राप्त जानकारी की तकनीकी जांच और फिल्टरिंग की जाएगी। केवल एसएसओ आईडी के माध्यम से सत्यापित और वैध डेटा को ही अंतिम डेटाबेस में शामिल किया जाएगा।
सर्वे कार्य की निगरानी राजधारा सर्वे ऐप के माध्यम से जिला और ब्लॉक स्तर पर की जा रही है। इसके लिए मास्टर ट्रेनरों और प्रगणकों को पहले से प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
रिपोर्ट कई आधिकारिक स्रोतों पर होगी आधारित
आयोग ने बताया कि अंतिम अनुशंसा रिपोर्ट केवल वर्तमान सर्वे के आधार पर तैयार नहीं होगी। इसके लिए जनआधार डेटाबेस, 2011 की जनसंख्या के आधार पर वृद्धि के अनुमान, निर्वाचन आयोग के आंकड़ों सहित अन्य आधिकारिक स्रोतों का भी अध्ययन किया जाएगा।
आयोग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे सर्वे प्रक्रिया को लेकर फैल रही भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें और अधिकृत सर्वे टीम को सही एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराएं।






