सीकर, जिला एवं सेशन न्यायाधीश रूपा गुप्ता ने सीकर मुख्यालय स्थित निजी हॉस्टलों में रह रहे छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शालिनी गोयल ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस और बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों को समन्वित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
15 दिन में देनी होगी जांच रिपोर्ट
न्यायालय के आदेशानुसार जिला कलेक्टर को सभी निजी हॉस्टलों के पंजीकरण, अग्नि सुरक्षा, भवन सुरक्षा, छात्र सुरक्षा और अन्य वैधानिक मानकों की सक्षम अधिकारियों से सघन जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करते हुए 15 दिनों के भीतर अनुपालना रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी।
पुलिस को निष्पक्ष जांच और सुरक्षा के निर्देश
न्यायालय ने अनुसंधान अधिकारी को प्रकरण की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच सुनिश्चित करने तथा सभी मौखिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विधि अनुसार संकलन करने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही पुलिस अधीक्षक, सीकर को पीड़ित बालक और उसके परिवार को किसी भी प्रकार के भय, दबाव या धमकी से सुरक्षित रखने तथा आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
पीड़ित के संरक्षण और पुनर्वास पर भी जोर
न्यायालय ने जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) और बाल कल्याण समिति (CWC) को पीड़ित बालक के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संरक्षण, काउंसलिंग और पुनर्वास की तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को सभी संबंधित विभागों के साथ सतत समन्वय स्थापित कर न्यायालय के निर्देशों की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा सभी विभागों को निर्धारित समय-सीमा में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।






