झुंझुनूं में बेटी का सपना कुचल गया

लेकिन कभी-कभी नियति इतनी क्रूर हो जाती है कि उड़ान भरने से पहले ही पंख टूट जाते हैं।
ऐसा ही झुंझुनूं जिले के बजावा रावतका गाँव की 17 वर्षीय अनन्या के साथ हुआ।
भोर की पहली किरण और आखिरी दौड़
31 जनवरी को जोधपुर में होने वाले एयरफोर्स फिजिकल टेस्ट की तैयारी के लिए सुबह घर से निकली थी अनन्या ।
हाथों में देशभक्ति का जज्बा और पैरों में दौड़ की रफ्तार थी।
लेकिन जयपुर-अजमेर एक्सप्रेस हाईवे के पास एक तेज रफ्तार थार ने उसके सपनों और मेहनत को पल भर में कुचल दिया।
पिता की कैंसर से जंग और बेटी की ताकत
अनन्या के पिता रविंद्र कुमार शर्मा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे।
उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी बेटी अनन्या थी, जो हमेशा कहती थी—
पिता का इलाज अच्छे अस्पताल में कराऊंगी और उन्हें गर्व महसूस कराऊंगी।
अब इस पिता के पास केवल बेटी की यादें और उसकी मेहनत की कहानी बची है।
अनन्या का जीवन और संघर्ष
अनन्या, जयपुर के महारानी कॉलेज में बीएससी सेकंड ईयर की छात्रा थी।
पढ़ाई के साथ-साथ वह घर की जिम्मेदारियों को भी समझती थी।
पिछले दो साल से जयपुर में रहकर उसने अपनी पढ़ाई और कोचिंग पर ध्यान दिया था।
सबेरे-सबेरे अंधेरे में वह दौड़ और अभ्यास के लिए निकल जाती थी।
अधूरा रह गया वर्दी का सपना
31 जनवरी को जोधपुर में फिजिकल टेस्ट शुरू होना था,
लेकिन अनन्या अब वहां नहीं होगी।
उसकी मेहनत की कहानी हर अभ्यर्थी की आँखों में आंसू बनकर जरूर दिखाई देगी।
कैंसर पीड़ित पिता ने अपनी वो ‘शक्ति’ खो दी, जो उन्हें जीने की वजह देती थी।
अनन्या की वर्दी पहनने की जिद अब केवल फोटो और यादों में बची है।
स्थानिक समुदाय का दुख
गांव और स्कूल समुदाय अनन्या की मेहनत, लगन और हिम्मत को याद कर रहे हैं।
स्थानीय लोग कहते हैं,
“अनन्या जैसी बेटियाँ हमारे लिए प्रेरणा थीं। यह घटना पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा सदमा है।”
