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झुंझुनूं के अनेक परिवारों ने किया मिर्गी के कारणों और निदान को लेकर संवाद

झुंझुनू नागरिक मंच के सहयोग से वेबीनार का किया गया आयोजन

झुंझुनूं, कोरोना महामारीे के मद्देनजर झुंझुनू नागरिक मंच के सहयोग से वेबीनार का आयोजन किया गया जिसमें बच्चों के मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ डाॅ. शरद शर्मा ने मिर्गी रोग से बचने के उपाय बताए। वेबीनार में ऑनलाइन करीब चालीस परिवारों ने भाग लिया तथा सवाल भी पूछे, जिनका डाॅ. शर्मा ने जवाब दिया। डाॅ. शर्मा ने कहा कि इस समय सभी तरह के रोगियों को बहुत ही सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि कोरोना वायरस ऐसे लोगों के शरीर को बहुत जल्दी पकड़ता है जिन्हें कोई अन्य बीमारी हो और वे उसका उपचार ले रहे हों। मिर्गी रोग भी ऐसा ही एक रोग है जिसके रोगी को कोरोना से बचाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि मिर्गी दिमाग की गतिविधियों में अचानक होने वाला अनियंत्रित परिवर्तन है। बच्चों में मिर्गी के सही कारणों को जान कर उसका उचित उपचार कर गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है। डाॅ. शर्मा ने बताया कि बच्चों में मिर्गी का कारण ऑक्सीजन की कमी, खून और खून में शुगर की कमी, कैल्शियम की कमी, आंतरिक रक्तस्राव, विशेष रूप से मस्तिष्क में दिमागी बुखार या संक्रमण को माना जाता रहा है। लगभग एक तिहाई बच्चों में मिर्गी रोग का कारण पता नहीं चलता। मिर्गी का पता लगाने के लिए खून की जांच, दिमाग की एमआरआई, मस्तिष्क की तरंगों की जांच, रीड की हड्डी के पानी की जांच आदि करवानी चाहिए। मिर्गी के दौरे की दवाइयां कई प्रकार की होती हैं और लंबे समय तक चलती है, इसलिए दवाइयों को समय से सुचारू रूप से लेना जरूरी है। आम धारणा है कि मिर्गी लाइलाज बीमारी है जिसके लिए जीवन पर्यंत दवाईयों का सेवन करना पड़ता है यह धारणा गलत है। अक्सर डॉक्टर अधिकतर बच्चों में कुछ वर्षों में मिर्गी के दौरे कम करने या बंद करने में सफल हो जाते हैं। बेवीनार के अंत में झुंझुनूं नागरिक मंच के संयोजक उमाशंकर महमिया ने सभी का आभार जताया। मंच के उपाध्यक्ष कमल कांत शर्मा और रामगोपाल महमिया ने भी सहयोग किया।

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