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वैज्ञानिक पद्दति से पशु आहार का निर्माण

डॉ. योगेश आर्य, नीम का थाना

पशुधन से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए पशु आहार के संघटको को उचित मात्रा में मिलाकर संतुलित आहार दिया जाना आधारभूत तथ्य है अत: लाभकारी पशुपालन के लिए यह आवश्यक है कि पशुओ का पोषण प्रबंधन सही हो एवं पशुओ को संतुलित पशु आहार मिले |
हमारा देश विश्व में पशुधन की संख्या में पहले स्थान पर है तथा दूध उत्पादकता में भी प्रथम है लेकिन इसके बाद भी हमारे देश में प्रति पशु उत्पादकता कम है जिसका मुख्य कारण पशुओ को संतुलित आहार का ना मिल पाना है | पशुपालन के कुल खर्च का लगभग 70{44d7e8a5cbfd7fbf50b2f42071b88e8c5c0364c8b0c9ec50d635256cec1b7b56} भाग पशु आहार पर खर्च किया जाता है | देश में राजस्थान का दूध उत्पादन में दूसरा स्थान है, राजस्थान जैसे मरू प्रदेश में शुष्क जलवायु और अकाल की समस्या के कारण पशुओ को पौष्टिक और संतुलित आहार देना एक बड़ी चुनौती है | राजस्थान के पशुपालक मुख्यतया हरे चारे की कमी के संकट से जूझ रहे है जिसके कारण पशुओ में विशेषतया मिनरल विटामिन की कमी हो जाती है | राज्य के पशुपालक वैज्ञानिक विधियों तथा संतुलित आहार का उपयोग कर दूध उत्पादन में बढोतरी कर सकते है |
संतुलित पशु आहार :- चारे /चारे दाने का वह मिश्रण जिसमे पशु के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व जैसे कार्बोहायड्रेट , प्रोटीन, वसा, खनिज लवण , विटामिन इत्यादि उचित मात्रा एवं निश्चित अनुपात में मौजूद हो , संतुलित पशु आहार कहलाता है |
पशुओ के पशु आहार में मुख्यतया छ: तत्व पाए जाते है – 1 कार्बोहायड्रेट 2 वसा 3 प्रोटीन 4 खनिज लवण 5 विटामिन 6 पानी
ये सभी तत्व पशु को दिए जाने वाले पशु आहार में निश्चित मात्रा में उपलब्ध होने चाहिए जिससे पशु को संतुलित आहार मिल सके |
पशु आहार के मुख्य घटक : पशु आहार के मुख्यतया तीन प्रकार के अवयव शामिल किये जाते है –
1 सुखा चारा – इसमे मुख्यतया चारागाह घास, गेंहू की तुड़ी , भूसा , बाजरे की कड़बी / तुड़ी /तुंतड, ज्वार तुड़ी /कुट्टी , मक्का की तुड़ी , धान की पुआल , मूंगफली चारा , मुंग – मोठ चारा , ग्वार चारा एवं खाखला इत्यादि |
2 हरा चारा – इसमे रबी की फसल में रिजका , बरसीम, जई , सरसों चरी इत्यादि तथा खरीब की फसल में ज्वार, बाजरा, मक्का, ग्वार, मकचरी इत्यादि आते है |
3 दाना / बांटा – इसमे कपास/मूंगफली/सरसों/तिल की खल , गेंहू /चावल की चापड़ , मुंग/मोठ/ग्वार की चुरी एवं अनाज जैसे मक्का, जौ , ज्वार, जई एवं बाजरा इत्यादि आते है |
ये उपरोक्त सभी अवयव मिलकर एक संतुलित आहार का निर्माण करते है |
संतुलित आहार का निर्माण :-
पशुओ के लिए संतुलित आहार बनाते समय उपलब्ध खाद्य पदार्थ तथा इनके स्रोत , पशु की आवश्यकता, आहार पर होने वाले खर्च आदि बातो को ध्यान में रखना चाहिए | पशुपालन को लाभकारी बनाने के लिए संतुलित आहार में ऐसे खाद्य पदार्थ को शामिल करे जो सस्ती दरो पर उपलब्ध हो जैसे सुखी घास, कड़बी, तुड़ी , दलहनी चारा एवं आवश्यकता अनुसार दाने का मिश्रण – मक्का, बाजरा, जौ, ज्वार ,चापड़ , चुरी कोरमा एवं खल का प्रयोग करना चाहिए |
पशुओ में पशु आहार की आवश्यकता की गणना आहार में उपलब्ध शुष्क पदार्थ के आधार पर की जाती है | प्रति 100 किलो वजन के पशु के लिए 2.5 किलो शुष्क पदार्थ देसी गायो के लिए तथा शंकर नस्ल की गायो एवं भैसों के लिए 3 किलो शुष्क भार की आवश्यकता होती है | इस आहार को (शुष्क पदार्थ के आधार पर ) चारे एवं दाने में 2/3 ( दो तिहाई ) चारा एवं 1/3 ( एक तिहाई) दाने में बांटकर खिलाया जाता है अगर हरा चारा उपलब्ध हो तो 3/4 (तीन चौथाई) भाग सुखा चारा एवं 1/4 (एक चौथाई) भाग हरा चारा दिया जाता है | उदाहरण – 400 किलो वजन के पशु के लिए 2.5 किलो शुष्क भार प्रति 100 किलो वजन के अनुसार 10 किलो शुष्क भार की आवश्यकता होगी | इसमें 10 किलो शुष्क भार में 2/3 यानि 6.66 किलो सुखा व हरा चारा (5 किलो सुखा +1.66 किलो हरा चारा ) तथा 1/3 यानि 3.33 किलो दाना शामिल किया जाता है |
यह पशु आहार / दाना मिश्रण पशु पालक अपने घर पर भी आसानी से बना सकता है|
दाना मिश्रण बनाना : दाना मिश्रण बनाने के लिए एक या एक से अधिक दानो को निश्चित अनुपात / मात्रा में मिलाकर संतुलित दाना मिश्रण तैयार किया जाता है जो सस्ता, पोष्टिक , संतुलित होना चाहिए | इस मिश्रण में लगभग 18 – 22 {44d7e8a5cbfd7fbf50b2f42071b88e8c5c0364c8b0c9ec50d635256cec1b7b56} प्रोटीन तथा 65-70 {44d7e8a5cbfd7fbf50b2f42071b88e8c5c0364c8b0c9ec50d635256cec1b7b56} कुल पाच्य पोषक तत्व होने चाहिए | दाना मिश्रण में जौ, मक्का का दलीया , गेहूं या चावल की चापड़ , चुरी , कोरमा , खल आदि सही अनुपात में मिला सकते है | दाना मिश्रण 2 {44d7e8a5cbfd7fbf50b2f42071b88e8c5c0364c8b0c9ec50d635256cec1b7b56} खनिज लवण व 1{44d7e8a5cbfd7fbf50b2f42071b88e8c5c0364c8b0c9ec50d635256cec1b7b56} नमक आवश्यक रूप से मिलाना चाहिए| खनिज मिश्रण के लिए “बोविमिन-बी” पावडर का प्रयोग सर्वोत्तम रहता हैं। “बोविमिन-जीएल” ऑरल सॉल्यूशन भी बाजार में उपलब्ध हैं। दाना मिश्रण के खिलाने से कुछ घंटे पहले पानी में भिगोना चाहिए तथा खिलाते समय इसमें थोड़ा सा सुखा चारा मिलाकर छानी के रूप में उपयुक्त रहता है |
पशु को दिये जाने वाले दाना मिश्रण की मात्रा :
शारीरिक रखरखाव के लिए – 400 किलो औसत वजन के लिए पशु को लगभग 1.5 किलो दाना मिश्रण प्रति दिन देना चाहिए
दूध उत्पादन के लिए – दुधारू पशुओ को रखरखाव के लिए दिए जाने वाले मिश्रण के अलावा दूध की मात्रा के अनुसार अतिरिक्त दाना मिश्रण निम्नानुसार देवें –
गायों के प्रति 2.5 किलो दूध के लिए एक किलो दाना मिश्रण जैसे 10 किलो दूध देने वाली गाय को प्रति दिन 4 किलो दूध उत्पादन के लिए तथा 1.5 किलो रखरखाव के लिए यानि 5.5 किलो कुल दाना मिश्रण देना चाहिए |
भैसों में प्रति 2 किलो दूध के लिए एक किलो दाना मिश्रण देना चाहिए |
गर्भावस्था के आखरी तीन महीनो में अतिरिक्त 1.5 किलो दाना मिश्रण देना चाहिए |
संतुलित आहार देने के साथ पशुओँ का हर 3 माह में टिकाकरण करवाएं। काफी बार पशु मिट्टी और अवांछित पदार्थ खाने लगता हैं तो ‘पाइका’ के इस केस में कृमिनाशन के साथ- साथ “मेटफोस” बेहतर विकल्प हैं। पशुओँ का पाचन दुरुस्त करने में “लेटिफर-अल्ट्रा” पाउच अच्छे रहते है। ये पशुओँ की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक रहते हैं। “कोल” सस्पेंशन पाचन संबंधित सभी रोगों जैसे अपच, कब्ज, विषाक्तता इत्यादि में कारगर साबित हो रहा हैं। इसी प्रकार पशुओँ को “नेगेटिव ऊर्जा बेलेंस” से बचाने के लिए गर्भावस्था के समय “डी-कैड-माइनस” पावडर का प्रयोग सफल रहा हैं।

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