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झुंझुनूं में 6 साल के शोयब की बची जान: ढूकिया हॉस्पिटल में न्यूरो इलाज बना संजीवनी

छत से गिरने पर सिर में आई गंभीर चोट, 7 दिन की निगरानी से बची जान

 

झुंझुनूं के नंगली स्लेदीसिंह गांव का 6 वर्षीय शोयब भाटी अपने घर की छत पर पतंग उड़ा रहा था। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से वह छत से नीचे गिर गया

गिरते ही शोयब बेहोश हो गया और उसके सिर में गंभीर चोट आई, जिससे परिजन घबरा गए।

 चनाना से हायर सेंटर किया गया रेफर

प्राथमिक उपचार के बाद शोयब को चनाना से हायर सेंटर रेफर किया गया। परिजन उसे तत्काल ढूकिया हॉस्पिटल, झुंझुनूं लेकर पहुंचे।

 न्यूरो सर्जन की देखरेख में चला इलाज

ढूकिया हॉस्पिटल में न्यूरो सर्जन डॉ. नितिन चौधरी ने शोयब को गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में भर्ती कर लगातार मॉनिटरिंग के साथ इलाज शुरू किया।

लगभग 7 दिन तक चले गहन उपचार के बाद शोयब की जान बच गई और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।

समय पर न्यूरो इलाज मिलने से बच्चे की जान बच सकी,
डॉ. नितिन चौधरी, न्यूरो सर्जन

 न्यूरो सुविधा से बढ़ती है जान बचने की संभावना

ढूकिया हॉस्पिटल की निदेशक डॉ. मोनिका ढूकिया ने बताया कि

  • एक्सीडेंटल केस में तुरंत न्यूरो विशेषज्ञ तक पहुंचना बेहद जरूरी

  • न्यूरो सर्जन की निगरानी में इलाज से रिकवरी की संभावना कई गुना बढ़ जाती है

ऐसे मामलों में नजदीकी न्यूरो विशेषज्ञ के पास तुरंत इलाज शुरू करवाना चाहिए,
डॉ. मोनिका ढूकिया

 एक छत के नीचे कम्पलीट न्यूरो ट्रॉमा केयर

डॉ. ढूकिया ने बताया कि अस्पताल में

  • 🧠 कम्पलीट न्यूरो ट्रॉमा केयर

  • 🕒 24×7 इन-हाउस 32 स्लाइस CT स्कैन

  • 🩺 सोनोग्राफी, ब्लड व प्लाज्मा सुविधा

उपलब्ध है।

 कैशलेस इलाज की सुविधा

ढूकिया हॉस्पिटल में

  • RGHS

  • ECHS

  • ESIC

  • चिरंजीवी योजना

  • MAA योजना

के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
यहां न्यूरो के साथ-साथ गुर्दा रोग, घुटना जोड़ प्रत्यारोपण, फिजिशियन व सर्जरी विशेषज्ञ की सेवाएं भी नियमित रूप से दी जा रही हैं।