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Video News : सरकारी अस्पताल के PICU में शॉर्ट सर्किट से आग, 15 बच्चे बाल-बाल बचे
 

नेबूलाइज मशीन लगाते ही हुआ शॉर्ट सर्किट, इमरजेंसी एग्जिट न होने पर सवाल
 
 

पीकू वार्ड में अचानक लगी आग

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/174mId6shAY?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/174mId6shAY/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640"> चूरू, स्थित गर्वमेंट डीबी अस्पताल की मातृ-शिशु इकाई के दूसरे मंजिल पर बने PICU वार्ड में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब बिजली के शॉर्ट सर्किट से आग लग गई।

हादसे के वक्त वार्ड में करीब 15 गंभीर बीमार बच्चे भर्ती थे।

 नेबूलाइज करते समय हुआ शॉर्ट सर्किट

जानकारी के अनुसार भालेरी से भर्ती एक बच्चे की मां ने जब नेबूलाइज मशीन को पैनल बोर्ड में प्लग लगाया, उसी समय शॉर्ट सर्किट हो गया और बोर्ड में आग लग गई।

मशीन का बटन दबाते ही पैनल बोर्ड में चिंगारी निकली और आग लग गई,
डॉ. सिद्धार्थ, ड्यूटी डॉक्टर (PICU)

 अग्निशमन यंत्रों से टली बड़ी अनहोनी

वार्ड में मौजूद छह अग्निशमन यंत्रों की मदद से गार्ड और स्टाफ ने तुरंत आग पर काबू पा लिया
यदि समय रहते आग नहीं बुझाई जाती, तो ऑक्सीजन लाइन के कारण पूरा अस्पताल चपेट में आ सकता था।

बच्चों को पीडिया वार्ड में किया शिफ्ट

सुरक्षा को देखते हुए सभी बच्चों को तुरंत पीडियाट्रिक वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। किसी भी बच्चे को नुकसान नहीं हुआ, जो राहत की बात रही।

 अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर

इस घटना के बाद गंभीर लापरवाही सामने आई है

  •  PICU वार्ड में इमरजेंसी एग्जिट नहीं

  •  पहले भी शॉर्ट सर्किट की शिकायतें

  •  तीन साल पहले गिरी थी वार्ड की सीलिंग, आज तक मरम्मत नहीं

  •  दो पैनल बोर्ड बदलने की मांग, लेकिन कार्रवाई शून्य

 मौके पर पहुंचे जिला कलेक्टर व अधिकारी

घटना की सूचना पर जिला कलेक्टर अभिषेक सुराणा,
सीएमएचओ डॉ. मनोज शर्मा,
अधीक्षक डॉ. दीपक चौधरी और
उप अधीक्षक डॉ. इदरीश खान
अस्पताल पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

 प्लास्टिक वॉल बनी थी बड़ा खतरा

ड्यूटी डॉक्टर के अनुसार वार्ड में प्लास्टिक की वॉल बनी हुई है, जिससे आग और भयावह हो सकती थी।
गनीमत रही कि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया।

 Shekhawati Live Impact

यह घटना सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा इंतजामों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। बच्चों के वार्ड में ऐसी लापरवाही भविष्य में जानलेवा साबित हो सकती है।