झुंझुनूं में अक्षय तृतीया (आखातीज) और पीपल पूर्णिमा के अवसर पर संभावित बाल विवाह को रोकने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।
जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं, ताकि इस सामाजिक कुरीति पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
बाल विवाह को बताया दंडनीय अपराध
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि बाल विवाह न केवल सामाजिक बुराई है, बल्कि यह एक कानूनी अपराध भी है।
उन्होंने कहा,
“बाल विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास को प्रभावित करता है, इसलिए इसे हर हाल में रोकना जरूरी है।”
विशेष टीमों का गठन, हर स्तर पर निगरानी
प्रशासन ने निगरानी तंत्र को मजबूत करते हुए विशेष टीमों का गठन किया है।
इन टीमों में शामिल हैं:
- प्रशासनिक अधिकारी
- पुलिस विभाग
- महिला एवं बाल विकास विभाग
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
इनका मुख्य कार्य:
- संभावित विवाह स्थलों की पहचान
- जागरूकता अभियान
- मौके पर पहुंचकर विवाह रुकवाना
स्कूलों और गांवों में जागरूकता अभियान
स्कूलों में विशेष सभाओं के जरिए विद्यार्थियों और अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है।
वहीं ग्राम स्तर पर सरपंच और वार्ड पंचों को भी निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि गांवों में समय रहते कार्रवाई हो सके।
पुलिस की गश्त बढ़ी, सूचना तंत्र मजबूत
संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है और सूचना तंत्र को सक्रिय किया गया है।
बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक अरविंद ओला ने बताया,
“किसी भी सूचना पर तुरंत कार्रवाई होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।”
मैरिज गार्डन और पंडितों को सख्त निर्देश
प्रशासन ने मैरिज गार्डन संचालकों, धर्मशालाओं और पंडित/काजियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:
बिना आयु प्रमाण पत्र जांचे कोई विवाह न कराया जाए
हेल्पलाइन नंबर जारी, आमजन से सहयोग की अपील
प्रशासन ने आमजन के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:
- 181 (महिला हेल्पलाइन)
- 100 (पुलिस)
- 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन)
जिला कलेक्टर ने नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे बाल विवाह जैसी कुप्रथा खत्म करने में सहयोग करें और समाज को जागरूक बनाएं।



