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मंडावा के देवी प्रसाद बागड़ोदिया को अगर चंद नाहटा लिप्यंतरण सम्मान रविवार को

चूरू/मंडावा, जोधपुर के कथा संस्थान की ओर से दिए जाने वाले सम्मान के सिलसिले में रविवार को मंडावा के लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार, अनुवादक एवं लिप्यंतरणकर्ता देवी प्रसाद बागड़ोदिया को ‘अगरचंद नाहटा लिप्यंतरण सम्मान 2023-24’ प्रदान किया जाएगा। कथा संस्थान के संस्थापक सचिव एवं जाने-माने साहित्यकार मीठेश निर्मोही ने बताया कि बागड़ोदिया को यह सम्मान राजस्थानी कृति ‘मीराबाई’ के असमिया में लिप्यंतरण के लिए प्रदान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कथा संस्थान की ओर से प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में साहित्यकारों को उनके उत्कृष्ट योगदान पर सम्मानित किया जाता है। निर्मोही ने बताया कि वर्ष 1939 में डिब्रूगढ़, असम में जन्मे देवी प्रसाद बागडोदिया का पूरा लेखन असमिया संस्कृति को पूरे देश में फैलाने के लिए जाना जाता है। इन्होंने असमिया से हिन्दी एवं हिन्दी से असमिया में कई महत्वपूर्ण अनुवाद किये हैं। बागड़ोदिया ने असम के महत्वपूर्ण साहित्यकार ज्योति प्रसाद अग्रवाल की संपूर्ण साहित्यिक कृतियों का असमिया से हिंदी में अनुवाद किया है। उन्होंने असम में भक्ति संस्कृति को फैलाने वाले प्रसिद्ध समाज सुधारक महापुरुष शंकर देव की महत्वपूर्ण कृतियों ‘गुणमाला’ तथा ‘बोरगीत’ का हिंदी अनुवाद किया है तथा माधव देव द्वारा रचित ‘नाम घोसा’ जिसे असम की भागवत गीता माना जाता है, का भी हिन्दी में अनुवाद किया है। उन्होंने आपने मीराबाई के भक्ति गीत संग्रह व संक्षिप्त जीवनी का असमिया में अनुवाद किया है, जिसके लिए मीरा स्मृति संस्थान, चितौडगढ़ द्वारा इनको बागड़ोदिया ने हिंदी, असमिया, अंग्रेजी और राजस्थानी की चार सौ लोकोक्तियों के संकलन का महत्वपूर्ण काम भी किया है। इन्हें केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा ‘ट्रांसलेटर ऑफ रिमार्केबल स्टैंडर्ड सम्मान’ से सम्मानित किया जा चुका है । इसके अलावा फूलचंद खंडेलवाल समिति अवार्ड, असम सरकार का साहित्यिक सम्मान, सज्जन जैन स्मृति साहित्य पुरस्कार भी इन्हें मिल चुके हैं।

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