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मां की अंतिम इच्छा बनी गांव के लिए सौगात, अस्पताल के लिए दान की 1 बीघा जमीन

Land donation document handed over for village health centre

चूरू चूरू जिले के सुजानगढ़ क्षेत्र के बामणिया गांव में एक परिवार ने मानव सेवा और समाजहित का प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। गांव निवासी हरिराम प्रजापत ने अपनी दिवंगत मां सोना देवी की स्मृति में गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र खोलने के लिए करीब 10 लाख रुपये मूल्य की एक बीघा जमीन चिकित्सा विभाग को दान कर दी।

इस पहल से गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का रास्ता खुल गया है और ग्रामीणों को भविष्य में बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिलने की उम्मीद जगी है।

निधन से पहले मां ने जताई थी इच्छा

पंचायत प्रशासक नवीन सीलू के अनुसार सोना देवी ने अपने निधन से करीब डेढ़ महीने पहले परिवार के सदस्यों से गांव में अस्पताल की जरूरत को देखते हुए जमीन दान करने की इच्छा व्यक्त की थी।

परिवार ने उनकी इस इच्छा का सम्मान करते हुए उनके निधन के बाद इसे पूरा करने का निर्णय लिया।

मां के निधन के एक सप्ताह बाद सौंपा दान पत्र

हरिराम प्रजापत ने बताया कि उनकी मां सोना देवी का 2 जून को निधन हो गया था। मां की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए परिवार ने एक सप्ताह के भीतर उप स्वास्थ्य केंद्र के लिए भूमि दान करने की प्रक्रिया पूरी कर दी।

मंगलवार को हरिराम प्रजापत ने खुड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहित मोदी को भूमि दान पत्र सौंप दिया।

पोस्टमैन बेटे ने निभाया मां का सपना

हरिराम प्रजापत वर्तमान में रावला (श्रीगंगानगर) में पोस्टमैन के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि मां की इच्छा पूरी होने से पूरा परिवार संतुष्ट और खुश है।

“मां हमेशा चाहती थीं कि गांव में अस्पताल बने ताकि लोगों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े। उनकी इच्छा पूरी कर हमें आत्मिक संतोष मिला है।” हरिराम प्रजापत

गांव के लोगों को मिलेगा सीधा लाभ

ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित होता है तो आसपास के लोगों को प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं के लिए दूर-दराज के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

इससे विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी।

ग्रामीणों ने किया सहयोग

हरिराम प्रजापत ने बताया कि इस सामाजिक कार्य के लिए हनुमान सिंह सीलू, जालाराम डूडी, सोहनराम टांडी, नानकराम ढाका और इलाराम प्रजापत ने उन्हें प्रेरित किया और जमीन दान की प्रक्रिया में सहयोग भी किया।

यह पहल गांव में सामाजिक जिम्मेदारी और जनसेवा का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।

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