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संवेदनशील भावों के साथ मिट्टी की महक से भरा है भाव-गागर : डाॅ कृष्णाकांत पाठक

अकादमी अध्यक्ष दुलाराम सहारण, एडीजे व्यास एवं सभापति पायल सैनी ने किया पत्रकार-कवि आशीष गौतम आशु कविता संग्रह ‘भाव-गागर’ का लोकार्पण

चूरू, राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित चूरू के पत्रकार-कवि आशीष गौतम आशु के पहले कविता संग्रह ‘भाव-गागर’ का लोकार्पण शनिवार को जिला मुख्यालय स्थित नगरश्री सभागार में राजस्थान साहित्य अकादमी अध्यक्ष दुलाराम सहारण, चूरू जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव डाॅ शरद कुमार व्यास तथा सभापति पायल सैनी ने किया। इस मौके पर कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े मुख्य वक्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं राजस्थान सरकार में शासन सचिव (वित्त-राजस्व) ने साहित्य एवं पत्राकारिता पर चर्चा करते हुए आशीष गौतम को शुभकामनाएं दीं और कहा कि जहां पत्रकारिता जागरुक करने का काम करती है, वहीं साहित्य को भी सत्यम, शिवम, सुंदरम का आदर्श आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने विभिन्न दर्शन और मान्यताओं को उद्धृत करते हुए कहा कि विविधता समाज को सुंदर बनाती है। साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है लेकिन वह पूरे समाज का दर्पण नहीं हो सकता है। कोई भी साहित्य समाज के किसी हिस्से विशेष का अथवा कुछ व्यक्तियों के विचारों का दर्पण हो सकता है। उन्होंने प्रख्यात दार्शनिक अरस्तू को उद्धृत करते हुए कहा कि विद्रूपता को जब चित्रित किया जाता है तो वह सुंदर हो जाती है। उन्होंने कहा कि आशीष गौतम के इस कविता संग्रह में कवि के संवेदनशील भावों के साथ मिट्टी की महक भी है। उन्होंने कहा कि आज संचार माध्यमों में आ रहे बदलाव के साथ साहित्य की भाषा भी बदल रही है, लोगों का झुकाव भी साहित्य एवं दर्शन की तरफ कम हो रहा है। वर्तमान साहित्य की चुनौतियों को पार करने में भाव-गागर सफल साबित हुआ है।

कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े पुलिस महानिरीक्षक ओमप्रकाश पासवान ने भी आशीष गौतम के व्यक्तित्व और कृतित्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने अनुभवों और सामाजिक यथार्थ को अपनी कविताओं का विषय बनाया है और बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डाॅ शरद कुमार व्यास ने आशीष गौतम की सृजनशीलता की सराहना करते हुए कहा एक बेहतर, खुशहाल और सार्थक जीवन जीने के लिए संवेदनशीलता, रचनात्मकता और सकारात्मकता बेहद जरूरी हैं। उन्होंने चूरू के लोगों की संवेदनशीलता और तहजीब की तारीफ करते हुए कहा कि निस्संदेह यहां की धरती सृजनशील लोगों की धरती है, यहां के लोगों से मिलकर खुशी होती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डाॅ दुलाराम सहारण ने अकादमी की विभिन्न योजनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि अकादमी की यह कोशिश रही है कि नए से नए लेखक को प्रोत्साहन मिले और वरिष्ठ से वरिष्ठ लेखक को सम्मान मिले। अकादमी के इस कार्यकाल की तरफ देखते हैं तो एक संतुष्टि होती है कि अकादमी बेहतर एवं रचनात्मक लोगों को मंच, अवसर और सम्मान देने की कोशिशों में सफल रही है। उन्होंने कहा कि यह बेहतर चीजों को समझते हुए उन्हें समर्थन देने का समय है।

विशिष्ट अतिथि सभापति पायल सैनी ने कहा कि आज के भागमभाग और धनार्जन के क्रूर समय में यदि कोई व्यक्ति अपने भीतर इस तरह की संवेदनशीलता और सृजनशीलता को बचाए रख पाता है तो यह बहुत अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि आज के जमाने में साहित्य पढ़ने के माध्यम भी बदल गए हैं लेकिन जो बात किताबों की खुशबू में होती है, वह ऑनलाइन माध्यमों में नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सभी को इंसान बने रहने के लिए किताबों, कविताओं और साहित्य के लिए थोड़ा-बहुत समय निकालना चाहिए।

साहित्यकार डाॅ घनश्याम नाथ कच्छावा एवं मोहन सोनी ने आशीष गौतम की किताब की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए विभिन्न रचनाओं में समेटे गए भावों और कला पक्ष पर चर्चा की।
कुलदीप शर्मा ने विचार व्यक्त करते हुए आशीष गौतम की रचनात्मकता और व्यवहारकुशलता की सराहना की। आशीष गौतम ने अपने वक्तत्व में अपनी रचना प्रक्रिया पर चर्चा की और कहा कि इस यात्रा में बहुत से लोगों का स्नेह, सहयोग मिला। उन्होंने इस किताब में अपने अनुभवों और सामाजिक यथार्थ को शब्द देने का प्रयास किया है।

संचालन मुकुल भाटी ने किया। गौतम परिवार के दामोदर गौतम ने स्वागत उद्बोधन दिया। ललित गौतम ने आभार जताया। इस दौरान रतनगढ़ के विद्याधर शर्मा एवं हरिप्रसाद शर्मा भी मंचस्थ रहे।

शिक्षाविद कमल कोठारी, साहित्यकार डाॅ सुरेंद्र सोनी, बनवारी खामोश, बाबूलाल शर्मा, ललित गौतम, मधु शर्मा, रंजना शर्मा आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। आरंभ में इंदिरा सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

इस दौरान सहायक निदेशक (जनसंपर्क) कुमार अजय, एपीआरओ मनीष कुमार, नीलम गौतम, राजेंद्र शर्मा मुसाफिर, विजय कांत शर्मा, रतनगढ़ के श्रीकांत आत्रेय, पार्थ सोनी, छापर के कन्हैयालाल स्वामी, विकास मील, हेमंत सिहाग, दलीप सरावग, नगरश्री के श्याम सुंदर शर्मा, निशा शर्मा, निशा गौड़, अनिल रजनी कुमार, अनूप सैनी बेबाक, जितेंद्र शर्मा, मयंक गौतम, लोकेश, बुधमल सैनी, सज्जन सिंह सैनी, मनीष सरिता कुमार, संदीप जांगिड़, सरिता शर्मा, राजकुमारी सैनी, रितु निरानियां, भगवती शर्मा, सुशीला प्रजापत, विनीता स्वामी, गीता रावत, सुमित श्रीवास्तव, ललित मीना, रामचंद्र गोयल, जसवंत सिंह मेड़तिया सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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