राजस्थान सरकार की उष्ट्र संरक्षण योजना ऊंट पालकों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आ रही है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में संचालित इस योजना के जरिए चूरू जिले के पशुपालकों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है।
ऊंट पालकों को मिल रहा आर्थिक संबल
राज्य सरकार द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य राज्य पशु ऊंट के संरक्षण को बढ़ावा देना और पशुपालकों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है।
योजना के तहत ऊंटनी के ब्यात के बाद पशुपालकों को सहायता राशि दी जाती है।
धर्माराम को मिला योजना का लाभ
चूरू जिले के सुजानगढ़ क्षेत्र के ग्राम जैतासर निवासी धर्माराम मेघवाल को भी इस योजना का लाभ मिला है।
धर्माराम ने बताया कि उन्होंने अपनी ऊंटनी के ब्यात के बाद 18 मार्च 2025 को ऑनलाइन आवेदन किया था।
सत्यापन के बाद जारी हुई सहायता राशि
आवेदन के बाद संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा 20 मई 2025 को ऊंटनी और टोरड़ा का भौतिक सत्यापन किया गया।
सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पशुपालन विभाग, चूरू द्वारा वित्तीय स्वीकृति जारी की गई।
धर्माराम को दिसंबर 2025 में योजना की पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये प्राप्त हुए।
पालन-पोषण में मिली मदद
धर्माराम ने बताया कि इस सहायता राशि से ऊंटनी के पालन-पोषण और देखभाल में होने वाले खर्च में मदद मिली है।
उन्होंने योजना के लिए राज्य सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यह योजना ऊंट पालकों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रही है।
दो किस्तों में मिलते हैं 20 हजार रुपये
गौरतलब है कि उष्ट्र संरक्षण योजना के तहत ऊंट पालकों को 10-10 हजार रुपये की दो किस्तों में कुल 20 हजार रुपये की सहायता राशि देने का प्रावधान है।
यह योजना राज्य पशु ऊंट के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।




