राजस्थान दिवस पर विरासत, लोक संस्कृति और परंपराओं का रंगारंग उत्सव
चूरू में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और राजस्थान स्थापना दिवस के अवसर पर चूरू महोत्सव 2026 का भव्य आगाज हुआ।
शहर में दिनभर संस्कृति, परंपरा और लोक कला का अद्भुत संगम देखने को मिला।
मंदिर में पूजा-अर्चना से हुआ शुभारंभ
गढ़ परिसर स्थित गोपालजी मंदिर में विधायक Harlal Saharan, जिला कलक्टर Abhishek Surana और एडीएम अर्पिता सोनी सहित जनप्रतिनिधियों ने पूजा-अर्चना कर जिले की खुशहाली की कामना की।
इसके बाद ढफ और नगाड़ों की थाप के साथ महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
विरासत कार्निवल यात्रा बनी आकर्षण का केंद्र
गढ़ परिसर से शुरू होकर सफेद घंटाघर, सुभाष चौक होते हुए बागला स्कूल मैदान तक विरासत कार्निवल यात्रा निकाली गई।
इस दौरान:
- ऊंट और घोड़ी के करतब
- कच्छी घोड़ी नृत्य
- लोक वाद्य यंत्रों की धुन
ने लोगों का मन मोह लिया।
कला मंच पर रंगारंग कार्यक्रम
बागला स्कूल खेल मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में कला मंच पर शानदार प्रस्तुतियां दी गईं।
विधायक हरलाल सहारण ने फीता काटकर महोत्सव का शुभारंभ किया।
इस दौरान अतिथियों ने हस्ताक्षर कैनवास पर हस्ताक्षर कर सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का संकल्प लिया।
कलाकारों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम में ऊंट सजावट प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए देबूराम को सम्मानित किया गया।
क्या बोले जनप्रतिनिधि
विधायक हरलाल सहारण ने कहा:
“चूरू की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, रेत के धोरों और लोक परंपराओं से है। यह महोत्सव हमारी जड़ों से जोड़ता है।”
जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने कहा:
“चूरू महोत्सव हमारी सांस्कृतिक जीवंतता और सामाजिक एकता का प्रतीक है।”
संस्कृति और एकता का प्रतीक
महोत्सव में बड़ी संख्या में शहरवासी, कलाकार और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक उत्सव रहा, बल्कि सामाजिक सद्भाव और एकता का भी संदेश दे गया।
