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चूरू में डिजिटल इण्डिया लैंड रिकार्ड मॉडनाईजेशन प्रोग्राम के अन्तर्गत कार्यशाला आयोजित

जिला कलक्टर  मुक्तानंद अग्रवाल ने कहा कि डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आद्युनिकीकरण कार्यक्रम के तहत चूरू जिले में भी भूमि के स्पष्ट स्वामित्व तथा भू-अभिलेख को आधुनिक तकनीकों की सहायता से अपडेट रखने हेतु पारदर्शी व्यवस्था को लागू किया गया है। इसमें तिव्रता लाने की आवश्यकता है। अग्रवाल कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित डिजिटल इण्डिया लैंड रिकार्ड मॉडनाईजेशन प्रोग्राम के अन्तर्गत सर्वे/ रिसर्वे प्रशिक्षण कार्यशाला में बोल रहे थे। अग्रवाल ने कहा कि परम्परागत रूप से गट्ठा और चैन पर आधारिक सर्वेक्षण प्रणाली अत्यंत विलम्बकारी, महगी एवं कमोबेश त्रुटिपूर्ण होने के कारण भू-अभिलेख जमाबन्दी एवं नक्शों के क्षेत्रफल में भिन्नता पाई जाती है। इसलिए इस डिजिटल कार्यक्रम के अन्तर्गत आधुनिक संसाधनों से डिजिटल भू-अभिलेख तैयार किया जा रहा है। जिससे जमाबन्दी, नक्शा व मौका का क्षेत्रफल एक समान होगा साथ ही इस डिजिटाईजेशन से भूमि आवंटन, विभाजन एवं डिक्री, सीमाज्ञान के मामलों का भार भी निश्चित रूप से कम हो जायेगा। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल प्रणाली से भू-अभिलेख को अपडेट करने, सर्वेक्षण, भू-सम्पति के पंजीयन, नामांकरण आदि को सम्पादित करने के लिए एकल खिड़की व्यवस्था होगी अर्थात यह सम्पूर्ण कार्य इंटरनेट प्रक्रिया द्वारा किया जायेगा। इससे काश्तकार को समय पर एवं सरल प्रक्रिया से बिना किसी परेशानी के कार्य सम्पादित कराने की सुविधा होगी। इस कार्यक्रम से काश्तकारों को धरातलीय वास्तविकता पर आधारित रिकार्ड एवं समस्त रिकार्ड वैबसाईट पर सुलभ होगा। स्वचलित नामान्तरकरण प्रक्रिया के फलस्वरूप भू-सम्पति के हस्तांतरण में धोखाधड़ी से बचाव होगा। सही सूचना आधारित भूमि पास-बुकों को जारी किया जा सकेगा। भू-अभिलेखों का डिजिटल होने पर कृषक अपना खेत कही पर भी इंटरनेट मोबाईल में देख सकता है। अपने खेत की भुजाओं की जानकारी मीटर माप में ले सकता है और माप कर सकता है।    

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