चूरू में चंदन खेती पर प्रशिक्षण, किसानों को मिलेगा बड़ा मुनाफा
चूरू स्थित रिहाई संस्थान परिसर में कृषि वानिकी परियोजना के तहत व्यावसायिक चंदन की खेती को लेकर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में मरुस्थलीय क्षेत्र में सफेद और लाल चंदन की खेती की संभावनाओं और किसानों को मिलने वाले लाभों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
मरुस्थलीय क्षेत्र में चंदन की संभावनाएं
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सिविल राइट सोसायटी जिलाध्यक्ष एडवोकेट रामेश्वर प्रजापति ने कहा कि राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में चंदन के पेड़ लगाए जाने की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने बताया कि भूमि और पानी की जांच के बाद इस क्षेत्र में सफेद चंदन की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। चंदन के पेड़ों को लगभग 15 साल बाद काटने और उचित स्थान पर विक्रय करने की अनुमति व्यवस्था संभव हो सकती है।
किसानों को मिलेगा बेहतर मुनाफा
विशेषज्ञों ने बताया कि चंदन की खेती किसानों के लिए लंबी अवधि का लाभकारी निवेश साबित हो सकती है। हालांकि चार डिग्री से कम और 40 डिग्री से अधिक तापमान में विशेष देखभाल की आवश्यकता रहती है।
प्रशिक्षण में किसानों को यह भी बताया गया कि सही तकनीक और प्रबंधन के जरिए चंदन की खेती से अच्छा आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है।
पोर्टल पंजीयन और मुफ्त कोर्स की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पोर्टल पर पंजीयन प्रक्रिया की जानकारी दी गई। साथ ही व्यवसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए उपलब्ध निशुल्क शिक्षा कोर्स के बारे में भी प्रतिभागियों को अवगत कराया गया।
कई क्षेत्रों के प्रतिभागी रहे मौजूद
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान निदेशक भंवरलाल रुयल ने की। वहीं प्रबंध निदेशक फूलाराम और सहायक निदेशक सुमन कंवर ने प्रशिक्षण प्रदान किया।
दो दिवसीय प्रशिक्षण में चूरू के अलावा सरदारशहर, रतनगढ़ और तारानगर से आए करीब दो दर्जन फील्ड एजुकेटिव और ब्लॉक कॉर्डिनेटर शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन जीवराज कस्वा लालासर ने किया।





