चूरू के गाजसर गेनानी (तालाब) के पास स्थित बीड़ क्षेत्र अब नीलगाय और चिंकारा हिरणों के लिए खतरे का क्षेत्र बनता जा रहा है।
यहां करीब 50 से ज्यादा आवारा कुत्तों का झुंड वन्यजीवों पर लगातार हमला कर रहा है। पिछले चार-पांच दिनों में ही तीन नीलगाय इन कुत्तों का शिकार बन चुकी हैं।
झुंड बनाकर करते हैं हमला
स्थानीय लोगों के अनुसार आवारा कुत्ते बेहद खतरनाक तरीके से शिकार करते हैं।
कुत्ते झुंड बनाकर पहले नीलगाय को डराते हैं और उसे गेनानी तालाब की तरफ भगाते हैं। वहां पहुंचकर वे नीलगाय पर हमला कर देते हैं।
कई बार कुत्तों के काटने से घायल होकर या पानी में डूबने से नीलगाय की मौत हो जाती है। बाद में यही कुत्ते उसे अपना भोजन बना लेते हैं।
चिंकारा हिरणों की संख्या भी घट रही
इसी तरह आवारा कुत्ते चिंकारा हिरणों का भी शिकार कर रहे हैं।
वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि क्षेत्र में पहले बड़ी संख्या में हिरण दिखाई देते थे, लेकिन अब उनकी संख्या कम होती जा रही है।
मॉर्निंग वॉक करने वालों में भी डर
बीड़ क्षेत्र के पास मुख्य सड़क पर हर सुबह बड़ी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक के लिए आते हैं।
लेकिन आवारा कुत्तों के झुंड के कारण अब लोगों में भी डर का माहौल है। कई लोगों ने अकेले बीड़ क्षेत्र में जाने से परहेज शुरू कर दिया है।
शिक्षाविद् ने बताया खौफनाक मंजर
स्थानीय शिक्षाविद् रवींद्र शर्मा ने बताया कि वे रोज सुबह कैमरा लेकर इस क्षेत्र में घूमने आते हैं और वन्यजीवों की तस्वीरें लेते हैं।
उन्होंने बताया:
“चार दिन पहले मैंने देखा कि कुत्तों का झुंड एक नीलगाय को दौड़ाकर गेनानी की तरफ ले गया और उस पर हमला कर दिया। मैंने इसका वीडियो भी रिकॉर्ड किया।”
उन्होंने आगे बताया कि दो दिन पहले फिर सात-आठ कुत्तों को एक नीलगाय पर हमला करते देखा।
“नीलगाय खुद को बचाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन कुत्ते लगातार काट रहे थे। वह दृश्य बेहद डरावना था।”
वन विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 और 2 मई को हुई वन्यजीव गणना में क्षेत्र में:
- 43 नीलगाय
- 52 हिरण
मौजूद पाए गए।
लेकिन लगातार हो रहे हमलों से इन वन्यजीवों की संख्या घटने का खतरा बढ़ गया है।
सुरक्षा इंतजाम नहीं होने से बढ़ी चिंता
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद की ओर से गेनानी क्षेत्र में कोई तारबंदी नहीं की गई है।
वहीं वन विभाग भी कर्मचारियों की कमी के कारण पर्याप्त निगरानी नहीं कर पा रहा है।
जानकारी के अनुसार चूरू रेंज के 1983 हेक्टेयर वन क्षेत्र की जिम्मेदारी बेहद कम कर्मचारियों पर है।
वर्तमान में यहां:
- 1 वनपाल
- 2 सहायक वनपाल
- 9 कैटल गार्ड/टेक्नीशियन
ही कार्यरत हैं।
वन्यजीव संरक्षण को लेकर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से आवारा कुत्तों पर नियंत्रण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो क्षेत्र से नीलगाय और चिंकारा हिरण लगभग खत्म हो सकते हैं।




