चूरू जिले में पुलिस ने साइबर ठगी और उसके अवैध नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया है।
जिला पुलिस अधीक्षक निश्चय प्रसाद (IPS) के निर्देशन में 1 से 30 अप्रैल तक “ऑपरेशन म्यूल हंटर” चलाया गया।
6 करोड़ से ज्यादा की ठगी का खुलासा
इस अभियान के दौरान पुलिस ने 6 करोड़ 39 लाख 60 हजार रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा किया।
यह राशि म्यूल खातों के जरिए साइबर अपराधियों द्वारा ट्रांसफर की जा रही थी।
547 संदिग्धों से पूछताछ, 80 पर कार्रवाई
एक महीने तक चले अभियान में पुलिस ने:
- 547 संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की
- 80 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की
- 23 एफआईआर दर्ज की
इससे साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर बड़ा असर पड़ा है।
हजारों संदिग्ध खातों और नंबरों की जांच
जांच के दौरान पुलिस को कई चौंकाने वाले तथ्य मिले:
- 1035 म्यूल अकाउंट्स
- 254 संदिग्ध मोबाइल नंबर
- 157 चेक विड्रॉल लोकेशन
- 58 एटीएम विड्रॉल लोकेशन
- 42 बैंक शाखाएं
इन सभी का उपयोग साइबर ठगी के पैसों के लेन-देन में किया जा रहा था।
अलग-अलग क्षेत्रों में करोड़ों का लेन-देन
जांच में सामने आया कि:
- चूरू साइबर थाना क्षेत्र: ₹2.50 करोड़
- सुजानगढ़: ₹1.03 करोड़
- राजगढ़: ₹1.38 करोड़
- सरदारशहर: ₹1.20 करोड़
अन्य क्षेत्रों को मिलाकर यह आंकड़ा 6 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया।
पुलिस टीम की मेहनत लाई रंग
इस अभियान में साइबर सेल और विभिन्न थानों के कर्मचारियों ने दिन-रात काम कर इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
आमजन के लिए जरूरी सलाह
पुलिस ने लोगों को साइबर ठगी से बचने के लिए चेतावनी दी है:
- अपना बैंक खाता किसी अनजान व्यक्ति को न दें
- ओटीपी, पैन कार्ड और एटीएम जानकारी साझा न करें
- संदिग्ध लेन-देन से बचें
- पेमेंट करते समय प्राप्तकर्ता का नाम जरूर जांचें
क्या होते हैं म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका उपयोग अपराधी दूसरों के नाम से ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।
अक्सर लोग लालच या अनजाने में अपना खाता उपलब्ध करा देते हैं, जिससे वे भी अपराध में शामिल हो जाते हैं।



