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चौथे पैरा ओलिंपिक मेडल के लिए फिनलैंड में पसीना बहा रहे हैं देवेंद्र

उम्र को चुनौती देेने को हैं तैयार

चूरू, बीस साल से देश के लिए पदक जीत रहे भारत के पैरा ओलिंपिक स्टार देवेंद्र झाझड़िया इन दिनों अपने चौथे ओलिंपिक मेडल के लिए फिनलैंड में पसीना बहा रहे हैं। आने वाली दस जून को जीवन के 41 वर्ष पूरे कर रहे देवेंद्र की उम्र हालांकि पेरिस ओलिंपिक के समय 43 साल होगी, लेकिन देवेंद्र उम्र को चुनौती देने को एकदम तैयार हैं और उनकी ट्रेनिंग बेहद अच्छी चल रही है।फिनलैंड से देवेंद्र ने बताया कि कुर्तने ओलिंपिक ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे हैं, यह दुनिया का बेहतरीन सेंटर है, जहां विश्व के बेस्ट एथलीट ट्रेनिंग लेते हैं। स्वयं देवेंद्र भी रियो पैरांलिंपिक से पूर्व यहां तीन महीने ट्रेनिंग ले चुके हैं। उल्लेखनीय है कि रियो पैरालिंपिक में देवेंद्र ने गोल्ड मेडल जीता था।

देवेंद्र ने बताया कि वे भारत सरकार की टॉप्स (टारगेट ओलिंपिक पोडियम स्कीम) के तहत यह प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिसका सारा खर्च भारत सरकार वहन कर रही हैं। उनके साथ उनके टोक्यो पैरा ओलिंपिक के फिटनेस ट्रेनर लक्ष्य बत्रा हैं। उन्होंने बताया कि उनका पहला टारगेट चाइना में होने वाले पैरा एशियन गेम हैं, जो अभी पोस्टपोन्ड हुए हैं। इसके बार पेरिस पैरा ओलिंपिक 2024 उनका लक्ष्य है। तैयारी बहुत अच्छी चल रही है। फिनलैंड का तापमान 5 से 10 डिग्री सैल्सियस चल रहा है और मेरा उद्देश्य है कि यहां बेहतर प्रशिक्षण कर कुछ सीखकर भारत आऊं।
देवेंद्र ने बताया कि भारत में खेलों की दुनिया में काफी बदलाव आया है। अभी टोक्यो ओलिंपिक खत्म हुए हैं और हमने अगले खेलों के लिए तैयारी शुरू कर दी है जबकि पहले ये होता था कि दो-तीन महीने पहले चर्चा शुरू होती थी और दो महीने में चर्चा खत्म हो जाती थी। बस पांच ही महीने का ओलिंपिक सत्र होता था। अब हम एक ओलिंपिक खत्म होने के साथ ही अगले की तैयारी में जुट गए हैं। पहली बार ऐसा हो रहा है कि इतना जल्दी सब तैयारी शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि आज तक पैरा ओलिंपिक से खाली हाथ नहीं आए हैं और अगर चाहने वालों की दुआएं रहीं तो निस्संदेह फिर एक गोल्ड मेडल के साथ पेरिस से लौटूंगा।

अपनी बढ़ती उम्र को लेकर उन्होंने कहा कि लोगों में यह धारणा रहती है कि चालीस के बाद कोई खिलाड़ी खेल नहीं सकता, लेकिन मैं इस धारणा को भी खत्म करना चाहता हूं। आप चालीस के बाद भी खेल सकते हैं, हालांकि आपको कुछ बातों का ज्यादा खयाल रखना होता है। चालीस के बाद यदि खेलते समय इंजरी हो गई तो उसे ठीक होने में बीस साल की उम्र के व्यक्ति की तुलना में कई गुना समय लगता है। ओवर ट्रेनिंग अक्सर इंजरी का कारण बनती है लेकिन हम उससे बच रहे हैं। मेरे ट्रेनर लक्ष्य बत्रा बहुत अच्छी ट्रेनिंग करवा रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि एक बार फिर देश के लिए पदक जीतूंगा।उन्होंने कहा कि हाल ही में भारत सरकार ने पद्मभूषण से सम्मानित किया है तो एक नया उत्साह है, एक जिम्मेदारी का भाव है। ऐसे अवार्ड हमें बहुत हौसला देते हैं। साथ ही यह दायित्व बोध भी है कि यदि देश हमें इतना दे रहा है तो हमें देश के प्रति और बेहतर करना होगा।

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