राजस्थान दिवस पर उठी मातृभाषा और सांस्कृतिक पहचान की आवाज
चूरू में राजस्थान दिवस की पूर्व संध्या पर राजस्थान कला, संस्कृति व विरासत संरक्षण अभियान के तहत एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह आयोजन नगर श्री शोध संस्थान में हुआ, जिसमें राजस्थानी भाषा और संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले।
कन्हैयालाल सेठिया को समर्पित रहा कार्यक्रम
कार्यक्रम का नाम “कन्हैयालाल सेठिया राजस्थानी उछब” रखा गया और इसे महान कवि कन्हैयालाल सेठिया को समर्पित किया गया।
संयोजक नितिन बजाज ने बताया कि यह आयोजन मातृभाषा के संरक्षण के उद्देश्य से किया गया।
‘धरती धोरां री’ को राज्य गीत बनाने की मांग
मुख्य अतिथि डॉ. घनश्याम नाथ कच्छावा ने अपने संबोधन में कहा:
“कन्हैयालाल सेठिया द्वारा रचित ‘धरती धोरां री’ राजस्थान की पहचान है, इसे राज्य गीत घोषित किया जाना चाहिए।”
उन्होंने सेठिया की अन्य रचनाओं “सरदार हियै सूं प्यारो हो” और “कुण जमीन रो धणी” का भी उल्लेख किया।
भाषा और संस्कृति संरक्षण पर जोर
मुख्य वक्ता डॉ. मधुसूदन मालानी ने कहा:
“अपनी मातृभाषा और संस्कृति को सहेजना बेहद जरूरी है, ऐसे प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक हैं।”
विशिष्ट अतिथि डॉ. सुरेंद्र डी. सोनी ने सुजानगढ़ स्थित सेठिया की हवेली को ऐतिहासिक स्मारक बनाने की आवश्यकता बताई।
राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता की मांग
कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. कमल सिंह कोठारी ने कहा कि मातृभाषा के बिना किसी प्रदेश की पहचान अधूरी है।
उन्होंने राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने में हो रही देरी पर चिंता जताई।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और ‘धरती धोरां री’ गीत से हुई।
डॉ. प्रमोद बाजोरिया, बांसुरी वादक रितेश प्रजापत और प्रीतम एंड ग्रुप सहित कई कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं।
प्रस्ताव हुआ पारित
कार्यक्रम के अंत में सर्वसम्मति से ‘धरती धोरां री’ को राजस्थान का राज्य गीत बनाने का संकल्प प्रस्ताव पारित किया गया।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में विरासत प्रेमी उपस्थित रहे।
