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बिना डिवाइडर मेगा हाइवे पर अधिकतम गति सीमा से तेज चलना दुर्घटना का बड़ा कारण

भानीपुरा थाने के सावर के पास 7 सितम्बर को हुए भीषण सड़क हादसे की सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी एवं सड़क सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर संयुक्त दल ने किया गहन अध्ययन, अब देंगे रिपोर्ट

चूरू, उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति एवं परिवहन तथा सडक सुरक्षा आयुक्त कन्हैया लाल स्वामी के निर्देशों पर संयुक्त जांच दल द्वारा जिले से निकल रहे मेगा स्टेट हाइवे संख्या 7 पर पुलिस थाना भानीपुरा के अन्तर्गत होटल बलवीर सिंह रोही सीवर पर घटित बोलेरो ट्रेलर भिड़ंत में 5 व्यक्तियों की मृत्यु तथा 10 व्यक्तियों के गंभीर रूप से घायल होने की भीषण सड़क दुर्घटना की जांच की गई।

जांच के दौरान अतिरिक्त जिला कलक्टर लोकेश कुमार गौतम, उपखण्ड अधिकारी सरदारशहर हरि सिंह शेखावत, आरटीओ जगदीश अमरावत, एआरटीओ डॉ वीरेंद्र सिंह राठौड़, डीटीओ ओम सिंह शेखावत, क्षेत्रीय परिवहन निरीक्षक सुरेश विश्नोई, पुलिस विभाग से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र, उप पुलिस अधीक्षक पवन भदोरिया, भानीपुरा एसएचओ गौरव खिड़िया, सानिवि अधीक्षण अभियन्ता शीशपाल सिंह तथा रिडकोर रोड ऑनिंग एजेंसी की ओर से प्रोजेक्ट इंजीनियर आकाश दीप, टोल प्लाजा सहायक मैनेजर जितेंद्र सोनी उपस्थित रहे ।

एआरटीओ राठौड़ ने बताया कि बिना डिवाइडर मेगा हाइवे पर अधिकतम राष्ट्रीय गति सीमा से तेज चलना दुर्घटना का बड़ा कारण है। बिना डिवाइडर के किसी भी हाइवे पर 9 सीट तक के यात्री वाहन की अधिकतम गति सीमा 70 किमी प्रति घण्टा तथा अन्य सभी वाहनों की 60 किमी प्रति घंटा ही है, लेकिन आमजन को इसकी जानकारी नहीं है। इस हाइवे पर मोड़ आदि पर चालक को अनिवार्य रूप से गति सीमा 40 किमी प्रति घंटा से अधिक नहीं रखनी चाहिए। वाहन चालक सीधे रोड पर 100 किमी प्रति घंटा तथा मोड़ पर 70 किमी प्रति घंटा से लोग चलते हैं।

उन्होंने बताया कि गति सीमा के नियंत्रण के लिए संयुक्त एवं प्रभावी रूप से एजुकेशन एवं एन्फोर्समेन्ट ड्राइव चलाने की आवश्यकता है। मेगा हाइवे की दूसरी सबसे बड़ी समस्या सफेद लगातार लाइन के बाहर बने 1.5 मीटर पेवड सोल्डर के साथ बराबर में 1.5 मीटर का कच्चा सोल्डर का सही नहीं बना होना है। मेगा हाइवे का राइट ऑफ वे 45 मीटर का है। केन्द्र से 3.5 मीटर लेन के बाद 3 मीटर के कच्चे- पक्के शॉल्डर के साथ बड़े बड़े बबूल एवं झाड़ियां हैं जिससे मोड़ पर ड्राइवर की दृष्टि बाधित हो जाती है।

राठौड़ ने बताया कि गांवों से हाइवे पर मिलने वाली सड़कों पर 50 मीटर पहले 20 किमी प्रति घण्टा कराने के साथ टै्रफिक मानक की पालना नहीं करने जैसी गलतियों पर प्रति गलती मोटर वाहन अधिनियम की धारा 198 ए के तहत सम्बन्धित रोड ऑनिंग एजेंसी रिडकोर, टोल प्रबंधन कन्सेसनर पर 1 लाख रुपए पेनल्टी का प्रावधान है। हाइवे पर ओवर लोडिंग, ऑवर क्राउडिंग, तेज गति, खनिज पदाथोर्ं का खुले में परिवहन आदि पर प्रभावी, पारदर्शी एवं व्यापक प्रवर्तन की कार्यवाही संयुक्त रूप से करने की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि टोल पर दुर्घटना ग्रस्त बोलेरो द्वारा उसी दिन तीन बार क्षमता से अधिक सवारियों का परिवहन करने के साक्ष्य मिले हैं। इन कारणों एवं समाधान पर संयुक्त दल ने सहमति जताई है। साथ ही टोल प्रबंधन की पेट्रोलिंग बढ़ाने एवं एम्बुलेंस के रेस्पोन्स टाइम को कम करने, हाइवे के किनारे स्थित लोगों को प्राथमिक चिकित्सा सहायता, सीपीआर का प्रशिक्षण देकर अधिक से अधिक फस्र्ट रिसपोन्डर बनाना है। यह रिपोर्ट परिवहन एवं सड़क सुरक्षा आयुक्त को भेजी जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति को भेजी जाएगी, जिसमें जिम्मेदार हितधारकों को सख्त कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।

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