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गणिका आर्यिका 105 विभाश्री माताजी का शहर में ससंघ मंगल प्रवेश हुआ

गणाचार्य 108 विरागसागर महाराज की विदुषी

सुजानगढ़, गणाचार्य 108 विरागसागर महाराज की विदुषी शिष्या गणिका आर्यिका 105 विभाश्री माताजी का शहर में ससंघ मंगल प्रवेश हुआ। माताजी नागौर से पैदल विहार कर लाडनू होते हुए सुजानगढ़ पहुंची हैं। जैन समाज के लोगों ने ढ़ोल-नगारों व बैंड बाजों के साथ स्वागत किया। माताजी की अगुवाई की गई और जुलूस के रूप में शहर में प्रवेश हुआ। पुलिया चौक पर मुस्लिम समाज की ओर से मो. इदरीश गौरी, नूर मोहम्मद पहाडिय़ान, हाजी मुंशी दहिया, ईकबाल खां, सलीम गौरी, किसान नेता इलियास खां, इरफान टाक आदि ने माताजी के संघ पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। इसी प्रकार विभिन्न मार्गों से होते हुए माताजी का संघ दिगम्बर जैन मंदिर पहुंचा। जहां चल रहे 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान आराधना महोत्सव में माताजी का सानिध्य मिलेगा। संयोजक सुरेंद्र बगड़ा ने बताया कि तीसरे दिन सर्वप्रथम भगवान जिनेंद्र की नित्य पाठ पूजा की गई व महाशांति धारा घीसूलाल विजय कुमार श्रीचंद बगड़ा परिवार द्वारा की गई। विधानाचार्य स्वतंत्र जैन के निर्देशन में पूजा हुई। सायंकालीन महाआरती घीसूलाल विजय कुमार श्रीचंद बगड़ा परिवार द्वारा बग्घी में सवार होकर रजत दीपकों से की गई। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां हुई। दूसरी ओर शहरवासियों को संदेश देते हुए 105 विभाश्री माताजी ने कहा है कि सिद्धचक्र महामंडल विधान में अनंतानंद सिद्ध परमेष्ठियों की आराधना होती है, सिद्ध परमेष्ठी की आराधना संपूर्ण पापों को दूर करती है और समाज में फैली मानसिक अशांति को दूर कर प्राणी मात्र में सुख शांति व समृद्धि को प्रदान करने वाली है। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष सदा-सदा से साधु संतों की साधना, उनके योग व तपस्या को प्रणाम करता आया है। सभी समुदायों की धर्म के प्रति आस्था यहां पर हमारी परंपरा रही है।

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