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प्रदेश के सब से कम वन क्षेत्र में मियावाकि फॉरेस्ट

मेणासर में जापानी मियावाकी पद्धति से लगाये 250 पौधे

मेणासर गाँव के निजी विद्यालय में समर्पण सेवा संस्थान रतनगढ़ द्वारा

रतनगढ़, [सुभाष प्रजापत ] मियावाकी पद्दति से विद्यालय के खेल मैदान में 2000 स्क्वायर फिट जमीन में जापानी मियावाकी तकनीक से अलग – अलग 45 प्रकार की किस्मों के 250 पौधों लगाये गये संस्थान के अध्यक्ष विरेन्द्र सैन ने बताया कि संस्थान पहले भी ऐसा प्रयोग गाँव धातरी मे किया था जो कि सफल रहा इस बार मेणासर गाँव मे मियावाकि पद्ति से 250 पौधे 45 प्रकार की किस्मों के रोपण किया गया है। संस्थान साल भर ऐसे कार्य करता रहता है। मियावाकी पद्धति | यह जापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी के नाम से प्रचलित इस पद्धति से किया गया पौधरोपण साधारण वृक्षों के मुकाबले यह 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं । साथ ही तीस गुना ज्यादा घने होते हैं । इस तकनीक में सभी प्रकार के पेड़ों की देसी प्रजातियां लगाई जाती हैं जो कि 3 वर्षों के भीतर आत्म स्थाई हो जाते हैं जिसके बाद उन वृक्षों को पानी या खाद की आवश्यकता नहीं होती हैं । यह पेड़ आने वाले लगभग दस साल में एक सामान्य प्राचीन जंगल जैसा रूप ले लेते हैं । गाँव के व्यवसाई परमेश्वर शर्मा के सहयोग से विधालय परिसर में पौधों का रोपण हुवा व इन की सारसंभाल की जिम्मेदारी ली गई
इस मौके पर विद्यालय के निर्देशक बनवारीलाल शर्मा,प्रधानाचार्य महिपाल शर्मा, शिक्षक रमजान खान,विजयपाल,सुमन नाई,सुमनकडवासरा,बीरबलसिंह,पवन जांगिड़,असलम खान,सवाई सिंह संस्थान के शक्ति सिंह,सांवरमल,योगेश शर्मा,जीवन प्रजापत, सुरेश गोड़,अशोक पारीक,भरत कोका,कॉमेडियन सुनील सैन, दलीप राणा आदि कायकर्ता उपस्थित रहे

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