चूरू। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों का लाभ अब किसानों तक भी पहुंच रहा है। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण चूरू जिले की बीदासर तहसील के कल्याणसर गांव के किसान खुमाराम हैं।
खुमाराम ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना के तहत अपनी अनुपयोगी भूमि पर 1.5 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर नई पहचान बनाई है।
अनुपयोगी जमीन बनी कमाई का बड़ा जरिया
खुमाराम के पुत्र लक्ष्मण ने बताया कि सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना में लगभग 5.45 करोड़ रुपये का निवेश किया गया।
वर्तमान में संयंत्र से उत्पादित बिजली का विक्रय जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JdVVNL) को किया जा रहा है, जिससे परिवार को हर महीने लगभग 8 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
“जिस भूमि का पहले सीमित उपयोग होता था, आज वही भूमि हमारे परिवार की आर्थिक समृद्धि का आधार बन गई है।” लक्ष्मण, किसान पुत्र
किसानों के लिए आय का नया मॉडल
लक्ष्मण का कहना है कि पीएम-कुसुम योजना ने किसानों के लिए अतिरिक्त आय के नए अवसर पैदा किए हैं। अब किसान केवल खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से भी नियमित आय अर्जित कर सकते हैं।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिल रही है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
राज्य सरकार का लक्ष्य राजस्थान को देश का अग्रणी हरित ऊर्जा राज्य बनाना है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में अक्षय ऊर्जा उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पीएम-कुसुम योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है, जिससे किसान ऊर्जा उत्पादक बनकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण को भी मिल रहा बढ़ावा
पीएम-कुसुम योजना के तहत किसान अपनी अनुपयोगी या कम उपयोग वाली भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर सकते हैं।
इससे:
- गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन बढ़ता है।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
- किसानों को दीर्घकालिक और स्थायी आय का स्रोत मिलता है।
क्या है PM-KUSUM योजना?
प्रधानमंत्री कुसुम योजना का उद्देश्य किसानों को सौर ऊर्जा उत्पादन से जोड़ना और उनकी आय बढ़ाना है। योजना के तहत किसान अपनी भूमि पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन कर सकते हैं और उसे विद्युत वितरण कंपनियों को बेच सकते हैं।
इससे किसानों को खेती के अलावा एक अतिरिक्त और स्थायी आय का स्रोत प्राप्त होता है।
किसानों के लिए क्यों खास है यह योजना?
- अनुपयोगी भूमि का बेहतर उपयोग
- बिजली बेचकर नियमित आय
- स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन
- पर्यावरण संरक्षण में योगदान
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती





