चूरू। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा गौवंश संरक्षण और संवर्धन के लिए संचालित योजनाओं का लाभ अब जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। रतनगढ़ पिंजरापोल गौशाला समिति को राज्य सरकार की गौ संवर्धन निधि योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता से गौसेवा कार्यों को नई मजबूती मिली है।
गौशाला को प्राप्त अनुदान से गौवंश के लिए चारा, पानी, पशु आहार और अन्य आवश्यक सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था की जा रही है।
1.64 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि मिली
पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित गौ संवर्धन निधि नियम-2016 एवं संशोधित नियम-2021 के तहत गौशालाओं को नियमित अनुदान दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि:
- बड़े गौवंश के लिए 50 रुपये प्रतिदिन
- छोटे गौवंश के लिए 25 रुपये प्रतिदिन
की दर से नौ माह तक सहायता राशि प्रदान की जाती है।
अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 की अवधि के लिए रतनगढ़ गौशाला को:
- 357 बड़े गौवंश
- 118 छोटे गौवंश
सहित कुल 475 गौवंश के लिए 35 लाख 70 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है।
वहीं नवंबर 2022 से मार्च 2026 तक कुल:
- 2485 बड़े गौवंश
- 609 छोटे गौवंश
अर्थात 3094 गौवंश के लिए 1 करोड़ 64 लाख 93 हजार 550 रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करवाई जा चुकी है।
नौ वर्षों से मिल रहा योजना का लाभ
रतनगढ़ पिंजरापोल गौशाला समिति के प्रतिनिधि अंजनी चोटिया ने बताया कि उनकी संस्था राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट-1958 और गौशाला अधिनियम-1960 के तहत पंजीकृत है।
उन्होंने बताया कि गौशाला को पिछले नौ वर्षों से गौ संवर्धन निधि योजना का नियमित लाभ मिल रहा है, जिससे गौवंश संरक्षण और पालन-पोषण कार्यों को लगातार मजबूती मिली है।
चारा, पानी और पशु आहार पर हो रहा खर्च
अंजनी चोटिया के अनुसार प्राप्त अनुदान राशि का उपयोग मुख्य रूप से:
- हरे एवं सूखे चारे की व्यवस्था,
- स्वच्छ पेयजल,
- पशु आहार,
- चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं
पर किया जाता है।
इससे गौशाला में आश्रय प्राप्त निराश्रित और बेसहारा गौवंश को बेहतर देखभाल और पोषण मिल रहा है।
गौसंरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता
अंजनी चोटिया ने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि गौसंरक्षण के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
“सरकारी सहायता से गौशाला का संचालन व्यवस्थित हुआ है और निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जा रहा है।”
उन्होंने गौहित और गौसेवा के लिए संचालित इस योजना के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार भी व्यक्त किया।
दो चरणों में मिलती है सहायता राशि
पशुपालन विभाग के अनुसार गौशालाओं को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में दो चरणों में अनुदान राशि वितरित की जाती है। इससे गौशालाओं को आर्थिक स्थिरता मिलती है और गौवंश की देखभाल में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती।





