भामाशाहों के सहयोग से चूरू जिले के स्कूलों में आधुनिक शिक्षा की पहल
रतनगढ़ (चूरू)। क्षेत्र के शैक्षणिक विकास को नई दिशा देने के लिए सरकारी स्कूलों में इंटरेक्टिव बोर्ड लगाने की बड़ी पहल की गई है।
अब रतनगढ़ के 75 से अधिक विद्यार्थी संख्या वाले सभी स्कूलों में एक-एक इंटरेक्टिव बोर्ड, जबकि 400 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में दो-दो बोर्ड स्थापित किए जाएंगे।
भामाशाहों के सहयोग से 14 बोर्ड की सौगात
इस योजना के तहत कोलकाता प्रवासी भामाशाह प्रदीप सराफ ने 21 लाख रुपये की राशि से 14 इंटरेक्टिव बोर्ड उपलब्ध करवाए हैं।
शुक्रवार को श्री गांधी बाल निकेतन, रतनगढ़ में आयोजित बैठक में 14 प्रधानाचार्यों ने अपने अनुरोध पत्र परियोजना निदेशक राजीव उपाध्याय को सौंपे।
340 संस्थानों में पहले ही लग चुके 373 बोर्ड
परियोजना फाउंडर उपाध्याय ने बताया कि अब तक चूरू जिले की 340 सरकारी शिक्षण संस्थाओं में 5.40 करोड़ रुपये की लागत से 373 बोर्ड लगाए जा चुके हैं।
इन 14 नए बोर्ड की स्थापना के बाद रतनगढ़ के 142 सरकारी स्कूलों-कॉलेजों में कुल बोर्ड संख्या 152 हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि
“परियोजना का उद्देश्य वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को आधुनिकतम शिक्षण टूल उपलब्ध कराना है, जो अब साकार होता दिख रहा है।”
देश का पहला जिला, जहां सभी कॉलेजों में बोर्ड
जानकारी के अनुसार चूरू जिला देश का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां सभी सरकारी कॉलेजों में इंटरेक्टिव बोर्ड से पढ़ाई हो रही है।
सीबीईओ संदीप व्यास ने कहा कि
“ऐसे बच्चों को भी लाभ मिला है जिन्होंने कभी टीवी तक नहीं देखा था। 75 इंच की बड़ी स्क्रीन पर पढ़ाई करना उनके लिए नया अनुभव है।”
इन स्कूलों में लगेंगे बोर्ड
रतनगढ़ ब्लॉक के शहरी, ग्रामीण और दुर्गम ढाणियों तक के स्कूलों में बोर्ड लगाए जाएंगे।
जिन प्रमुख विद्यालयों में स्थापना होगी, उनमें
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लाछड़सर, जोरावरपुरा, महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय कांगड़, बुधवाली, गणेशमल बैद, राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय लोहा, जैतासर, बीनादेसर सिद्धान, सिमसिया पुरोहितान, जेगणिया बीकान, हंसासर, देराजसर, बाढ़ां की ढाणी, छाबड़ी मीठी शामिल हैं।
शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण
बैठक में बाल निकेतन के शिक्षक देवेन मिश्रा, कौशल मिश्रा और ऋषभ शर्मा ने बोर्ड संचालन संबंधी प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दिया।
परियोजना समन्वयक पूर्व सीबीईओ कुलदीप व्यास ने बताया कि यह पहल क्वालिटी एजुकेशन की दिशा में बड़ा कदम है।
