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46 हजार पीएम आवास लाभार्थियों के घरों पर रिचार्ज पिट बनेंगे

अगले 4 महीनों में नरेगा के तहत 46 हजार घरों पर रिचार्ज पिट बनाने की तैयारी

चूरू,जिले के लगातार गिरते भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए जिला परिषद ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रिचार्ज पिट वैल बनाने का निर्णय लिया है।
यह काम नरेगा के तहत किया जाएगा और सबसे पहले पीएम आवास योजना के 46 हजार लाभार्थियों के घरों के सामने रिचार्ज पिट बनाए जाएंगे।

जिला परिषद बैठक में हुआ निर्णय

चार दिन पहले हुई जिला परिषद की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि प्रत्येक लाभार्थी घर के सामने पिट वैल बनाया जाए।
इस कार्य को आगामी चार महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

जिला परिषद सीईओ श्वेता कोचर ने बताया—

“बारिश के पानी को संरक्षित करने और भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए पीएम आवास लाभार्थियों के घरों के पास रिचार्ज पिट वैल बनाने का निर्णय लिया गया है। काम नरेगा में किया जाएगा।”

ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव मंगाए जाएंगे

इस योजना के लिए ग्राम पंचायतें, पंचायत समितियों के माध्यम से जिले को प्रस्ताव भेजेंगी।
प्रस्ताव स्वीकृति के बाद नरेगा में पिट वैल का कार्य शुरू किया जाएगा।

चूरू का भूजल स्तर चिंताजनक

विशेषज्ञों के अनुसार चूरू में भूजल का दोहन अत्यधिक है, जबकि जल संरक्षण के प्रयास कम रहे हैं।
2020 में जिले का औसतन भूजल स्तर 42.25 मीटर था और पिछले 5 वर्षों में यह केवल 0.07 मीटर ही बढ़ा है।
अधिक वर्षा होने के बावजूद पानी रिस कर जमीन में नहीं जा पाता।

कैसे होंगे रिचार्ज पिट वैल?

नरेगा एक्सईएन हरिराम माहिचा ने बताया कि—

“रिचार्ज पिट वैल की गहराई औसतन 4 मीटर से अधिक होगी और गोलाई में 3 मीटर चौड़ी होगी। खर्च लगभग 18–20 हजार रुपये आएगा। निर्माण सामग्री में सीमेंट, बजरी और गिट्टी का उपयोग होगा।”

उन्होंने कहा कि अलग-अलग ब्लॉक में मिट्टी और भूजल स्तर के आधार पर डिजाइन में बदलाव होगा।


रिचार्ज पिट वैल से होने वाले 4 बड़े फायदे

1. भूजल स्तर में सुधार

46 हजार घरों के सामने बनने वाले पिट वैल बारिश का पानी जमीन में रिसने देंगे, जिससे भूजल स्तर बढ़ेगा और बोरवेल-नलकूप सूखने की संभावना कम होगी।

2. नालियों की जरूरत नहीं

घर के सामने जमा होने वाला वर्षा जल सीधे पिट में जाएगा, जिससे अलग से नालियां बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

3. पानी की गुणवत्ता बेहतर होगी

रिचार्ज पिट सतह से आने वाले दूषित कणों को फिल्टर करते हैं और पानी की लवणता कम करते हैं, जिससे कुओं व बोरवेल का पानी अधिक शुद्ध होता है।

4. स्थानीय मिट्टी के अनुसार कम खर्च

जिले के हर ब्लॉक में मिट्टी व भूजल स्तर अलग है, इसलिए पिट वैल उसी अनुसार बनाए जाएंगे।
जहां मिट्टी कठोर होगी वहां कम सामग्री की जरूरत पड़ेगी, जिससे मजदूरी व लागत दोनों बचेंगी

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