प्रकृति से प्रेरणा लेने पहुंचे विश्व प्रसिद्ध संगीतकार तालछापर
चूरू जिले के तालछापर वन्यजीव अभयारण्य में विश्व विख्यात ग्रैमी विजेता संगीतकार रिकी केज ने शनिवार को दौरा किया।
तीन बार ग्रैमी अवॉर्ड जीत चुके केज ने यहां काले हिरण, देसी-विदेशी पक्षी, रेप्टाइल्स और दुर्लभ वनस्पतियों को करीब से देखा और जानकारी प्राप्त की।
प्रकृति से मिलती है संगीत की प्रेरणा
दौरे के दौरान रिकी केज ने कहा कि वन्यजीव और प्रकृति हमारे जीवन का अहम हिस्सा हैं।
“मैंने जो भी संगीत बनाया है, वह प्रकृति से प्रेरित है। जहां भी जाता हूं, वहां की प्रकृति से सीखता हूं।”
उन्होंने सभी लोगों से प्रकृति संरक्षण के लिए प्रयास करने की अपील भी की।
विशेषज्ञों ने दी जानकारी
इस मौके पर क्षेत्रीय वन अधिकारी एवं पक्षी विशेषज्ञ उमेश बागोतिया ने उन्हें अभयारण्य के विभिन्न जीवों और पक्षियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
एसीएफ क्रांति सिंह सहित वन विभाग के स्टाफ ने भी उनका स्वागत किया।
चूरू से जुड़ा है पारिवारिक संबंध
गौरतलब है कि रिकी केज के पिता चूरू के मूल निवासी थे, जिससे उनका इस क्षेत्र से विशेष जुड़ाव है।
रिकी केज को 2025 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था और 2023 में संयुक्त राष्ट्र सद्भावना राजदूत भी बनाया गया।
इसके अलावा, उन्होंने 13,944 आदिवासी बच्चों द्वारा राष्ट्रगान गाने का रिकॉर्ड बनाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी स्थान हासिल किया है।
लाडनूं में होगा कंसर्ट
रविवार को लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती के महाश्रमण स्पोर्ट्स ग्राउंड में रिकी केज का सीरेन सिंफनी कंसर्ट आयोजित होगा।
इस दौरान श्रद्धा गणेश, राकेश कठोतिया, राज सुराना और अभय जैन सहित कई लोग मौजूद रहे।
