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सालासर थाने के गांव बामणिया के सैनिक मदनलाल नेहरा की सैनिक समान से अंत्येष्टी

सालासर थाने के गांव बामणिया के सैनिक मदनलाल नेहरा की शनिवार सुबह हादसे में लेह लदाख में मौत हो गई। सैनिक 31 मार्च को सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर साउथ पॉलों के पास 4 किलोमिटर की दूरी पर सात गाडिय़ों के काफिले के साथ अपनी यूनिट के लिए राशन का सामान लेकर जा रहा था। उसी दौरान मदनलाल नेहरा का वाहन पहाड़ी से 500 मिटर गहराई पर आकर गिरा। जिसके बाद साथी जवानों ने सैनिक को निकालकर ईलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे थे उसी दौरान रास्ते में जवान ने दम तोड़ दिया। रविवार शाम को सैनिक का पार्थिव शरीर सालासर पहुंचा। जहां से सोमवार सुबह सैनिक के पैतृक गांव बामणिया लाया गया। सोमवार सुबह परिवार वालों को मदनलाल नेहरा के शहीद होने की खबर मिली जिससे घर में चीख पुकार शुरू हो गई। पत्नि बार-बार बेहोश हो रही थी। जिसको गांव के लोग संभाल रहे थे। हजारों लेाग अपने लाडले को नम आंखो से विदाई देने पहुंचे। सैकड़ों की तादाद में उपस्थित युवाओं ने मदनलाल अमर रहे, भारत माता की जय के नारों के साथ विदाई दी। 34 वर्षिय मदनलाल सेना में यूनिट 5102 एएससी साउथ बेंगलुरू में ड्राईवर के पर तैनात था। सैनिक समान से सोमवार को पैतृक गांव में अंत्येष्टी की गई। जहां पर राजस्थान सरकार के देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवां, प्रतिपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी, कांग्रेस जिला अध्यक्ष भंवरलाल पुजारी, विधायक खेमाराम मेघवाल, जिला कलेक्टर ललीत गुप्ता व एसपी राहुल बारहट सहित आस-पास के गांवों से लोग अंत्येष्टी में पहुंचे। आपको बतादें कि सैनिक मदनलाल के दो भाई व दो बहनें है।
उनके पिता भगवानाराम खेती का काम करते है। मदनलाल की शादी 2000 में स्यानण निवासी सुमन देवी के साथ हुई। सैनिक के एक दस वर्षिय लडक़ी व 6 वर्षिय लडक़ा है जो अभी पढ़ाई कर रहे है। मदनलाल 2003 में झुन्झुनू रैली में भर्ती हुआ था। दो महीने पहले ही छुटी काटकर गया था। 26 अप्रैल को फिर से गांव आने वाला था क्योंकि भाणजी की शादी में भात लेकर जाना था। लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था और देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

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