चूरू, राजस्थान में खारे पानी झींगा पालन को लेकर पहली बार विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP)-2026 जारी की गई है। यह गाइडलाइन खासतौर पर चूरू, बीकानेर, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में संचालित झींगा पालन फार्मों पर लागू होगी।
मत्स्य विभाग के अनुसार चूरू जिले में पिछले कुछ वर्षों में झींगा पालन तेजी से बढ़ा है और वर्तमान में निजी क्षेत्र में 200 हेक्टेयर से अधिक भूमि का उपयोग झींगा पालन के लिए किया जा रहा है।
चूरू बना सेलाइन वाटर एक्वाकल्चर क्लस्टर
मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ने वर्ष 2025 में चूरू जिले को “सेलाइन वाटर एक्वाकल्चर क्लस्टर” घोषित किया था।
अब राज्य सरकार ने झींगा पालन गतिविधियों को व्यवस्थित करने के लिए नई SOP जारी की है, ताकि फार्मों का रिकॉर्ड, पर्यावरण सुरक्षा और उत्पादन व्यवस्था बेहतर तरीके से संचालित हो सके।
झींगा फार्मों का पंजीकरण होगा अनिवार्य
मत्स्य सहायक निदेशक इरशाद खान ने बताया कि राज्य में संचालित सभी निजी झींगा फार्मों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
इसके लिए:
- आवेदन जिला मत्स्य अधिकारी को देना होगा
- पंजीकरण शुल्क 500 रुपये तय किया गया है
- मत्स्य विभाग राजस्थान नोडल विभाग होगा
इन झींगा प्रजातियों को मिली अनुमति
नई गाइडलाइन के तहत:
- पीनियस वैनामी
- पीनियस मेनोडोन
प्रजातियों की फार्मिंग को अनुमति दी गई है।
किसी नई प्रजाति की फार्मिंग शुरू करने के लिए राज्य सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
पर्यावरण सुरक्षा पर विशेष जोर
गाइडलाइन में जैव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं।
- झींगा बीज केवल अधिकृत हैचरी से लेना होगा
- बीज रोगमुक्त होना जरूरी होगा
- एंटीबायोटिक और प्रतिबंधित केमिकल्स के उपयोग पर रोक रहेगी
- बिना उपचारित अपशिष्ट जल आसपास छोड़ना प्रतिबंधित होगा
रिकॉर्ड रखना होगा अनिवार्य
फार्म संचालकों को:
- झींगा बीज
- आहार
- दवाइयां
- उत्पादन
से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।
विभागीय निरीक्षण के दौरान यह रिकॉर्ड अधिकारियों को दिखाना अनिवार्य होगा।
नियम नहीं मानने पर रद्द होगा पंजीकरण
मत्स्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि SOP की पालना नहीं करने वाले फार्मों का पंजीकरण रद्द किया जा सकेगा।
इस नई व्यवस्था से विभाग को झींगा पालन गतिविधियों का वास्तविक डेटा मिलेगा और भविष्य में क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं एवं योजनाओं का बेहतर विकास संभव हो सकेगा।




