चूरू जिले के रतनगढ़ में लोहा कच्चा मार्ग पर नव निर्मित शाकम्भरी माता मंदिर का भव्य उद्घाटन किया गया।
यह कार्यक्रम जगद्गुरु शंकराचार्य प्रज्ञानानंद सरस्वती के सान्निध्य में संपन्न हुआ।
शोभायात्रा और भव्य स्वागत
शंकराचार्य के आगमन पर उन्हें रथ पर विराजित कर भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
डीजे, घोड़ों पर सवार संतों के काफिले और पुष्प वर्षा के साथ मंदिर तक लाया गया।
विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा
कार्यक्रम में 108 कन्याओं का पूजन और हवन किया गया।
इसके बाद मां शाकम्भरी और काली की मूर्तियों की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की गई।
“देवी शाकम्भरी सभी दुखों को दूर कर समृद्धि और खुशहाली प्रदान करती हैं।” – शंकराचार्य
मंदिर निर्माण और उद्देश्य
मंदिर का निर्माण सुधीर कुमार चौमाल द्वारा प्रदत्त भूमि पर महंत आनंदगिरि महाराज के निर्देशन में हुआ।
इस मंदिर को क्षेत्र में आस्था और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने का उद्देश्य है।
क्षेत्र के विकास का संदेश
शंकराचार्य ने कहा कि देवी शाकम्भरी अकाल दूर कर हरियाली और समृद्धि लाने वाली हैं।
यह मंदिर क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था, शिक्षा और सेवा कार्यों का केंद्र बनेगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन
कार्यक्रम में आर्या पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
भजन गायक राकेश बावलिया ने भक्ति गीत प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे
इस आयोजन में दूर-दूर से आए संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु शामिल हुए।
सभी ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया और आयोजन की सराहना की।



