चूरू। राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में भूगर्भीय खारे पानी की समस्या लंबे समय से किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी चुनौती रही है। सीमित रोजगार, घटती खेती और आर्थिक संकट के कारण कई लोगों को गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन करना पड़ा।
लेकिन अब यही खारा पानी रोजगार और समृद्धि का माध्यम बनता नजर आ रहा है। चूरू जिले की सुजानगढ़ तहसील के राजियासर गांव निवासी नरेन्द्र सिंह राठौड़ इसकी प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आए हैं।
खारे पानी ने मजबूर किया था गांव छोड़ने को
नरेन्द्र सिंह राठौड़ बताते हैं कि खारे पानी और सीमित रोजगार के कारण उन्हें गांव छोड़कर बीकानेर शहर में रहना पड़ा।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े होने के बावजूद परिस्थितियों ने उन्हें दोहरी जिंदगी जीने पर मजबूर कर दिया था। खारा पानी उनके परिवार के लिए अभिशाप बन गया था।
झींगा पालन से बदली जिंदगी
नरेन्द्र सिंह ने गांव में उपलब्ध खारे पानी का उपयोग करते हुए झींगा पालन की संभावनाओं पर काम शुरू किया।
उन्होंने मत्स्य विभाग के माध्यम से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अनुदान के लिए आवेदन किया। योजना के अंतर्गत उन्हें पौण्ड निर्माण और आवर्ती लागत पर आर्थिक सहायता मिली।
सरकारी सहयोग और नई तकनीक की मदद से उन्होंने सफलतापूर्वक झींगा पालन शुरू किया और आज आर्थिक रूप से मजबूत बन चुके हैं।
ग्राम रथ अभियान में मिला स्वीकृति आदेश
रतनगढ़ के बुधवाली में आयोजित ग्राम रथ अभियान कार्यक्रम के दौरान नरेन्द्र सिंह को अनुदान भुगतान की वित्तीय स्वीकृति आदेश भी सौंपे गए।
इस मौके पर उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं और शिविरों के जरिए आमजन को वास्तविक लाभ मिल रहा है।
ग्रामीणों के लिए बने प्रेरणा
नरेन्द्र सिंह की सफलता अब आसपास के ग्रामीणों के लिए प्रेरणा बन रही है। उन्होंने साबित कर दिया कि सही योजना, तकनीक और सरकारी सहयोग से खारे पानी जैसी समस्या को भी रोजगार के अवसर में बदला जा सकता है।




