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गुमशुदा नाबालिग बच्चों की तलाश के लिए विशेष अभियान ‘खुशी’ 31 अगस्त तक

राजस्थान पुलिस की ओर से

चूरू, राजस्थान पुलिस की ओर से 12 वर्ष से कम आयु के गुमशुदा नाबालिग बच्चों की तलाश एवं पुनर्वास के लिए 31 अगस्त तक विशेष अभियान खुशी-चतुर्थ चलाया जाएगा। इस संबंध में मंगलवार को जिला पुलिस अधीक्षक दिगंत आनंद के निर्देशानुसार हुई बैठक में बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक नरेश बारोठिया ने कहा कि अभियान से जुड़े सभी लोग आपसी समन्वय के साथ इस प्रकार से कार्य करें कि अभियान अपनी मंशा में सफल हो। जिला मानव तस्करी यूनिट प्रभारी अभियान की प्रभारी उप निरीक्षक अल्का ने कहा कि सभी बाल कल्याण अधिकारी अपने-अपने इलाकों में गुमशुदा बच्चों को चिन्हित कर एक डायरेक्ट्री तैयार करें और गुमशुदा बच्चों के विवरण ट्रेक द मिसिंग चाइल्ड वेब पोर्टल पर अपलोड करें। अपने-अपने क्षेत्र में शेल्टर होम, गैर पंजीकृत चिल्ड्रन होम, स्पेशल होम, गुरुकुल आश्रम तथा सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं में जाकर उनमें रह रहे समस्त नाबालिग बालकों का डेटाबेस मय फोटो लिया जाकर पोर्टल पर अपलोड किया जाए तथा उनके माता-पिता से मिलवाया जाकर उनके पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सभी बाल कल्याण अधिकारी इस अभियान को सफल बनाने में प्रभावी भूमिका निभाएं तथा सभी विभागों, एनजीओ आदि से सहयोग लें। उन्होंने कहा कि अभियान को गंभीरता से लें और प्रभावी मॉनीटरिंग करते हुए कार्यवाही करें। उन्होंने बताया कि प्रत्येक थाना क्षेत्र पर बाल कल्याण अधिकारी नियुक्त किया गया है। गुमशुदा नाबालिग बालकों की तलाश के लिए प्रत्येक थानाधिकारी को टीम गठन के लिए कहा गया है। इस दौरान बालक और कुमार श्रम प्रतिषेध एवं निमियमन अधिनियम 1986, संशोधित अधिनियम 2016 तथा अन्य संबंधित कानूनों की विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान पुलिस के साथ समाज कल्याण विभाग, श्रम विभाग, सीडब्ल्यू सी. चाईल्ड हैल्प लाईन, एन.जी.ओ., समस्त बाल कल्याण अधिकारी सभी आपस में मिलकर जिले में स्थित शेल्टर होम/गैर-पंजीकृत चिल्ड्रन होम/स्पेशल होम/गुरुकुल आश्रम अनाथालय व सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं में निवास करने वाले, रेल्वे स्टेशन व बस स्टैण्ड पर भीख मांगने वाले बच्चे, सड़क के किनारे व झुग्गी झोपड़ियों में निवास कर रहे सभी बच्चों की स्क्रीनिंग कर उनके पूर्ण डाटा तैयार करेंगे, यदि उनमें से कोई बच्चा लावारिस/गुमशुदा की श्रेणी में पाया जाता है तो बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण करवाया जाकर सी.डब्ल्यू.सी चूरू के समक्ष पेश कर सम्बन्धित विभाग की सहायता से पुनर्वास करवाया जायेगा। बैठक में सहायक निदेशक (जनसंपर्क) कुमार अजय, आईसीडीएस सीडीपीओ सीमा सोनगरा, सब इंस्पेक्टर रमेश, केयर टेकर महावीर प्रसाद सोनी, भागीरथ मेघवाल, करणीदान, पन्नेसिंह, मनोज कुमार, हरफूल स्वामी, राजेश चौधरी, रामचंद्र, सुलोचना, रमजान अली, संगीता सहित सहित विभिन्न थानों के बाल कल्याण अधिकारी उपस्थित रहे।

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