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तुलसी का काव्य मंगल का प्रतीक है – गोस्वामी

रतनगढ़ (नवरतन प्रजापत ) तुलसी के काव्य में लोकमंगल की कामना प्रबल ही नहीं अपितु उनका काव्य मंगल का ही प्रतीक है। तुलसी ने अपने महाकाव्य का प्रारम्भ ही मंगलकामना से किया है। यह उद्गार वैद्य बालकृष्ण गोस्वामी ने स्थानीय देव-कुटीर में भारत विकास परिषद द्वारा शुक्रवार को आयोजित तुलसी जयंती समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ओमप्रकाश इंदौरिया ने तुलसी के जीवन पर विस्तार से चर्चा करते हुए उनके जीवन मे आई विभिन्न कठिनाइयों और उनसे तुलसी के संघर्ष पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में तुलसी जयंती के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की शोक सभा का भी आयोजन किया गया। भारत विकास परिषद के शाखा अध्यक्ष वैद्य लक्ष्मीनारायण शर्मा ने अटलजी को राष्ट्रनायक बताते हुए राजनीति के एक युगपुरुष बताया। भारतीय शिक्षण मंडल के शाखा अध्यक्ष राधेश्याम स्वामी ने भी विचार व्यक्त किये। युवा कवि मनोज चारण ने अपनी कविता ‘तुम सागर की गहराई थे, तुम थे नखत उज्ज्वल भारी।’ के माध्यम से अटलजी को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के उपाध्यक्ष अवतारसिंह छोकर ने की। कार्यक्रम में महावीर प्रसाद सेवदा, विनोद कुमार वर्मा, शार्दूलसिंह, जगदीश प्रसाद स्वामी, शिवप्रसाद स्वामी, आनन्द चोटिया, ऋषभ बैद सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम का मंचीय संचालन परिषद के कोषाध्यक्ष हिमांशु मालपुरिया ने की।

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