चूरू जिले में बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी और मानव तस्करी के उन्मूलन के लिए पुलिस प्रशासन ने विशेष अभियान ‘उमंग VII’ की शुरुआत की है। यह अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे जिले में चलाया जाएगा।
राजस्थान पुलिस मुख्यालय (सिविल राइट्स एवं एएचटी) जयपुर के निर्देशानुसार चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य बाल श्रम में फंसे बच्चों को मुक्त कराकर उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना और मानव तस्करी जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
पुलिस लाइन सभागार में हुई रणनीतिक बैठक
अभियान को सफल बनाने के लिए चूरू पुलिस लाइन सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिला पुलिस अधीक्षक निश्चय प्रसाद एम के निर्देश पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार ने की।
बैठक में मानव तस्करी विरोधी यूनिट (AHTU) के अधिकारी-कर्मचारी, बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्य, चाइल्ड हेल्पलाइन प्रतिनिधि और जिले के सभी बाल कल्याण अधिकारी मौजूद रहे।
होटलों, ढाबों और कारखानों पर होगी सघन जांच
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में बाल श्रम की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अभियान के तहत होटल, ढाबे, कारखाने, ईंट-भट्टे और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर विशेष स्क्रीनिंग और निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। इन स्थानों पर कार्यरत बच्चों की पहचान कर उन्हें बाल श्रम से मुक्त कराया जाएगा।
बच्चों के पुनर्वास पर रहेगा विशेष फोकस
अभियान के दौरान रेस्क्यू किए गए बच्चों के लिए पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाएगी। संबंधित विभागों और संस्थाओं के सहयोग से बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
प्रशासन का लक्ष्य केवल बच्चों को मुक्त कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और बेहतर भविष्य प्रदान करना भी है।
दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बच्चों से मजदूरी कराने, उनका शोषण करने या मानव तस्करी में संलिप्त पाए जाने वाले नियोक्ताओं, फैक्ट्री मालिकों और अन्य दोषियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
अधिकारियों ने कहा कि बाल अधिकारों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
समाज की भागीदारी भी जरूरी
पुलिस प्रशासन ने आमजन से भी अपील की है कि यदि कहीं बाल श्रम, बाल तस्करी या बच्चों के शोषण से जुड़ी कोई जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस या चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचित करें।
जन सहयोग से ही ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है और बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।





