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सैनिकों के बलिदान के दम पर ही हम ले रहे खुली हवा में सांस

23 वें शहादत दिवस पर गांव में उनकी प्रतिमा पर ग्रामीणों की ओर से पुष्पांजलि

चूरू, दूधवाखारा के कारगिल शहीद सेना मेडल सूबेदार सुमेर सिंह राठौड़ के 23 वें शहादत दिवस पर गांव में उनकी प्रतिमा पर ग्रामीणों की ओर से पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस दौरान ग्रामीणों ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए तथा ‘भारत माता की जय’ व ‘शहीद सुमेर सिंह अमर रहे’ के नारों के आसमान को गुंजायमान कर दिया।इस मौके पर सरपंच प्रतिनिधि डीके सिंह कस्वां ने कहा कि यह सैनिकों का साहस और बलिदान ही है कि हम यहां खुली हवा में सांस ले पाते हैं। उन्होंने कहा कि मां भारती के लिए अपना सर्वस्व त्याग देने वाले शहीद अमर हो जाते हैं। हमें अपने गांव के सपूत पर गर्व है और हम सभी को अपने-अपने ढंग से देश के लिए काम करने की कोशिश करनी चाहिए।

समाजसेवी रतन सिंह राठौड़ ने कहा कि सैनिक ऐसी-ऐसी जगह पर ऐसी परिस्थितियों में ड्यूटी करते हैं, जहां हम एक क्षण के लिए भी जाना नहीं चाहते। यह देश के प्रति उनकी भावना ही है जो हंसते-हंसते अपने प्राणों पर खेल जाते हैं। हम सभी के भीतर देश के लिए यह निष्ठा होनी चाहिए।
इस दौरान शहीद पुत्र सहायक प्रशासनिक अधिकारी नरेंद्र सिंह राठौड़, चंद्रभान बुडानिया, बजरंग सिंह, धर्मपाल, महेंद्र सिंह, रामकुमार सिंह, महेंद्र शर्मा, हवलदार शिशपाल स्वामी सहित ग्रामीणों, शहीद परिजनों ने सूबेदार सुमेर सिंह को याद किया और पुष्पांजलि दी।
उल्लेखनीय है कि दूधवाखारा में 15 अगस्त 1955 को जन्मे सुमेर सिंह 1977 में भारतीय सेना में भर्ती हुए। कारगिल युद्ध के दौरान उन्हें तोलोलिंग पहाड़ी फतेह करने का टास्क मिला, जो 13 जून सवेरे 4 बजे उन्होंने हासिल कर लिया लेकिन इस दौरान वे वीर गति को प्राप्त हो गए। भारत सरकार की ओर से उन्हें सेना मेडल से सम्मानित किया गया है।

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