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गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाये – लाम्बा

स्थानीय लाम्बा कोचिग कॉलेज में श्रीमद्- भगवद गीता जयंती समारोह पूर्वक मनायी गयी। कार्यक्रम के निदेशक शुभकरण लाम्बा,शिक्षाविद् टेकचन्द शर्मा पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी लियाकत अली खान, प्रो.अनिल कल्हरी, प्रो.मनोज स्वामी, प्रमोद पूनिया, नरेन्द्र जाखड़, गजेन्द्र एवं सैकड़ो सेना भर्ती के अभ्यार्थियो ने श्रीमद् भगवद् गीता पुस्तक की पुजा अर्चना की। श्रीमद् भगवद् गीता जयंती पर सम्बोधित करते हुए लाम्बा कोचिग कॉलेज केे निदेशक शभकरण लाम्बा ने आह्वान किया कि गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाये। वे लाम्बा कोचिंग कॉलेज परिसर में सेना भर्ती अभ्यार्थियो को गीता जयन्ती पर सम्बोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि गीता ब्रहमाण्ड का सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थ है ये राष्ट्र का दुर्भाग्य है कि गीता जैसे ग्रन्थ को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित नही किया गया। जिसे समस्त विश्व ने स्वीकारा है। उन्होने कहा कि हमारे देश की गुलामी का कारण भी यही रहा होगा क्यो कि गीता जैसे ग्रन्थ समस्त समाज को एकजुट रखते है जिसकी सख्त आवश्यकता रही है। उन्होने कहा कि विधालयो और महाविधालयों के पाठ्य क्रमो में गीता के प्रेरक शलोको को शामिल किया जाये जिससे मनुष्य संस्कारवान एवं चरित्रवान बने। जो संस्कारवान एवं चरित्रवान नही है व अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन नही कर सकता परिणाम स्वरूप समाज और राष्ट्र कमजोर पड़ जाते है और उन्हे कोई भी अधिन कर सकता है। उन्होने जापान देश का उदारण देते हुए कहा कि जापान संस्कारवान होने के कारण विश्व की दुसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है जबकि जापान कई बार कई प्रकार के संकट झेल चुका है। लियाकत बली खान ने अपने सम्बोधन में कहा कि दुनिया में हर सभ्यता संस्कृति में हर धर्म में कही ने कही गीता का उल्लेख है। चाहे ईसा मसीह, गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी, गुरू नानकदेव, मोहम्मद साहब हो। शिक्षाविद् टेकचन्द शर्मा ने अपने सम्बोधन में कहा कि गीता में हर समस्या का समाधान है हर कल्पना को साकार करने की क्षमता है गीता से मनुष्य देव बुद्धि की प्राप्ति कर सकता है कार्यक्रम के अन्त में सभी ने संस्था निदेशक शुभकरण लाम्बा के नेतृत्व में गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित करवाने का संकल्प लिया।

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