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पढ़ाई के लिए रेस्टोरेंट में धोये लोगों जूठे के बर्तन, रात में की UPSC की तैयारी, पढ़े IRS Officer जयगणेश की कहानी

Education News (एजुकेशन समाचार) : पढ़ाई के लिए रेस्टोरेंट में धोये लोगों जूठे के बर्तन, रात में की UPSC की तैयारी, पढ़े IRS Officer जयगणेश की कहानी

UPSC Success Story: यूपीएससी की परीक्षा देश के सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल बड़े पैमाने पर लोग इस परीक्षा को देते हैं लेकिन इसे पास मात्र कुछ बच्चे ही कर पाते हैं। आज हम आपको एक ऐसे अभ्यर्थी की कहानी बताएंगे जो कठिन परिश्रम करके इस परीक्षा को पास कर दिखाया।

चमड़े के फैक्ट्री में काम करते थे पिता

के जय गणेश के पिता तमिलनाडु के वेल्लोर जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं। वह चमड़ा के फैक्ट्री में काम करते थे जहां उन्हें महीने के 4500 रुपए मिलते थे। पिता के मिलने वाली मजदूरी से जय गणेश का घर नहीं चल पाता था यही वजह थी कि जय गणेश ने भी कम उम्र में नौकरी करना शुरू कर दिया।

जय गणेश के पास अधिक अच्छे संसाधन नहीं थे फिर भी उन्होंने 12वीं में 92 परसेंट अंक हासिल किया। अच्छे नंबर होने के कारण उन्हें स्कॉलरशिप मिली और बाद में उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग भी किया।

इंजीनियरिंग में एडमिशन तो मिल गई लेकिन फीस भरने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे यही वजह है की जय गणेश ने प्राइवेट नौकरी करनी शुरू कर दी। उनका लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा को पास करना था इसलिए प्राइवेट नौकरी के साथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। यूपीएससी की पढ़ाई और नौकरी दोनों संभव नहीं था इसलिए बाद में उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी।

प्राइवेट जॉब छोड़ने के बाद यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा यही वजह था की जय गणेश ने वेटर की नौकरी शुरू कर दी। उन्हें लोगों के झूठे गिलास उठाने पड़ते थे और झूठे बर्तन धोने पड़ते थे। इस काम से उन्हें ₹3000 हर महीने मिलते।

सफलता लोगों का इम्तिहान लेती है। वेटर और बिलिंग से मिलने वाले पैसे से कोचिंग का फीस नहीं भरा जा रहा था यही कारण था कि उन्हें बीच में कोचिंग छोड़नी पड़ी लेकिन यूपीएससी पास करने का जुनून कम नहीं हुआ। उन्होंने सेल्फ स्टडी के बदौलत पढ़ाई शुरू कर दी।

उन्होंने ठान लिया कि उन्हें यूपीएससी हर हाल में क्रैक करना है। सातवें प्रयास में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर दिखाई। 2008 में उन्हें यूपीएससी में 156वीं रैंक मिली। जय गणेश आईआरएस ऑफीसर बन गए।

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