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ना साधन थे, ना सहारा… फिर भी मुश्किलों के आगे नहीं मानी हार, बचपन में आंखें जाने के बाद भी IAS बने मनु गर्ग

Success Story: UPSC की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है।हर साल बड़े पैमाने पर छात्र इस कठिन परीक्षा को देते हैं। UPSC किसी भी कैंडिडेट का केवल ज्ञान का परीक्षण नहीं करती बल्कि उनके धैर्य अनुशासन और आत्मविश्वास की परीक्षा भी होती है।

कई कैंडिडेट है जिन्होंने मुश्किलों से लड़कर यूपीएससी जैसे कठिन परीक्षा को पास कर इतिहास रच दिया है। आज हम आपको मनु गर्ग की कहानी बताएंगे जो दृष्टिहीन होने के बावजूद भी यूपीएससी में शानदार रैंक प्राप्त किया और अपने सफलता की कहानी लिख दी। मनु गर्ग की कहानी आपकी रग रग में जोश भर देगी।

आईएएस ऑफिसर मनु गर्ग मूल रूप से राजस्थान के जयपुर के रहने वाले हैं। आठवीं कक्षा में एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी के कारण उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई और इस घटना के बाद उनके जीवन में अंधकार छा गया। आंख चले जाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी बल्कि लगातार कोशिश करते रहे और UPSC जैसे एग्जाम को पास कर दिखाया।

मनु गर्ग बचपन से पढ़ाई लिखाई में होशियार थे और उन्होंने कई डिबेट कंपटीशन में भी भाग लिया। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और इसके बाद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री ली। मनु गर्ग के सफलता में उनकी मां वंदना जैन का काफी बड़ा हाथ है। वह हमेशा मनु की ताकत बनकर खड़ी रही और पढ़ाई लिखाई में हर कदम पर साथ दिया। वह मनु के लिए किताबें पढ़ कर सुनती और खुद नोट्स बनाते थे।

पहले प्रयास में मनु गर्ग को सफलता नहीं मिली लेकिन 2024 में मनु ने ऑल इंडिया में 91वीं रैंक हासिल की और मात्र 23 साल की उम्र में वह आईएएस ऑफिसर बन गए।मनु गर्ग की कहानी यह बताती है की हौसला अगर हो तो इंसान मुश्किलों से लड़कर अपना अलग पहचान बन सकता है।

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