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झुंझुनू जिले में पिरामल फाउंडेशन के मैनेजमेंट व ग्रेजुएट इंजिनियर ट्रेनी ने सफलतापूर्वक पूर्ण किया अपना रूरल इमर्जन

झुंझुनूं, पिरामल फाउंडेशन देश के अनेक प्रदेशों में शिक्षा, स्वास्थ, जल, आदि के क्षेत्रों में अपने योगदान देती आई है और अपने नवाचारों और लोगों के परस्पर सहयोग से देश को एक आदर्श इकाई के रूप में आगे बढाने में अपनी भूमिका निभाती रही है | झुंझुनू जिले में शिक्षा के क्षेत्र में भी फाउंडेशन द्वारा कई सारे नवाचार किये गए हैं और अपने अथक प्रयासों से सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं बच्चो के सीखने सिखाने के आयामों में अपना योगदान सुनिश्चित किया है |

फाउंडेशन द्वारा एक प्रोग्राम जिसका नाम “गांधी फेलोशिप” है चलाया जाता है जिसमे देश के अलग अलग प्रदेशों से विविध शैली से सम्बन्ध रखने वाले युवा 2 साल के लिए आते हैं और देश के अलग अलग कोनों में शिक्षा, स्वास्थ, जल, आदि क्षेत्रों में कार्य करते हैं और वहां के लोगों के साथ मिलकर वहां की समस्याओं पर मिलकर कार्य करते हैं और एक प्रेरक के रूप में उन्हें आगे बढ़ने में मदद करते हैं | फेलोशिप में एक महत्वपूर्ण प्रोसेस “रूरल इमर्जन/कम्युनिटी इमर्जन” है जिसमें युवा गांधी फेलो समुदाय में रहते हुए वहां की शैली, संस्क्रती, भाषा, आदि को समझते हैं और वहां के लोगों के साथ मिलकर वहां ही समस्याओं को खोजकर उन पर कार्य करते हैं |

इसी प्रोसेस के तहत पीरामल फाउंडेशन की एक शाखा पीरामल फार्मा है जिसमें कार्यरत युवाओं को 15-20 दिन का “रूरल इमर्जन/कम्युनिटी इमर्जन” करना होता है जिसमें वह अलग अलग ब्लॉक के गाँवों व सरकारी विद्यालयों में जाकर कार्य करते हैं और वहां के लोगों के साथ मिलकर समस्याओं को हल करने का प्रयास करते हैं | झुंझुनू जिले के नवलगढ़ ब्लॉक की पंचायत ढिगाल व जेजूसर में फार्मा मैनेजमेंट व ग्रेजुएट इन्जीनर ट्रेनी शिवम् माने, प्रत्यूष , सारंगी कोठारी, सागर, प्रणव द्वारा अपना “रूरल इमर्जन/कम्युनिटी इमर्जन” पूर्ण किया गया | इस अवधि में इन युवाओं द्वारा पंचायत की रूप रेखा, वहां की संस्कृति, भाषा शैली, खानपान आदि को समझा गया साथ ही साथ होम विजिट द्वारा सरकारी विद्यालय में पढने वाले विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य के सम्बन्ध में माता-पिता के साथ एफ.जी.डी., गाँव में अलग अलग तरह की लेबर जॉब, कम्युनिटी प्रोफाइल, ग्राम पंचायत के साथ समूह में चर्चा आदि किया गया | वहीँ दूसरी और इन युवाओं द्वारा दोनों पंचायतों के विद्यालयों के पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों के शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ विस्तारपूर्वक बातचीत की गई जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यालय में पढने वाले विद्यार्थियों के सीखने में परिवर्तन लाना और सीखने के नए नए आयामों को खोलना था | इन युवाओं द्वारा कक्षा 6 से कक्षा 11 के विद्यार्थियों के साथ कैरियर गाइडेंस को लेकर सत्रों, फोकस्ड ग्रुप डिस्कशन, चेंज मेकर लैब बूटकैंप, आदि का आयोजन किया गया |

इसके अलावा विद्यालय में विद्यार्थी अधिगम केंद्र में “प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग वाल” को बनाया इन युवाओं द्वारा शिक्षक-शिक्षिकाओं, विद्यार्थियों एवं गांधी फेलो द्वारा बनवाया गया जिससे विद्यालय में परियोजना आधारित शिक्षण को वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से अभ्यास करने की ओर एक और कदम उठाया जा सके और विद्यार्थी अधिगम केंद्र की रूपरेखा को परवान चढ़ाया जा सके |

राजकीय विद्यालय बजवासुरोका में शिक्षक दिनेश जांगीड़ की सहायता से इन युवाओं ने गाँव के लोगों के साथ सामूहिक रूप से चर्चा करते हुए परियोजना आधारित शिक्षण, विद्यार्थियों के लिए शिक्षा में खुलते नए आयामों, रोजगारों, आदि के बारे में विशेष रूप से चर्चा की और विद्यालय में बनी टिंकरिंग लैब के माध्यम से बच्चों में विकसित होने वाले 21वीं सदी के कौशलों को लेकर विद्यालय के स्टाफ से बातचीत की |

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