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राजस्थान में शिक्षा का बड़ा बदलाव: 11वीं के छात्रों को अब मिलेगा चौथा ऐच्छिक विषय चुनने का मौका

सीबीएसई पैटर्न पर नया नियम लागू, छात्रों को करियर और रुचि के अनुसार विषय चुनने की आज़ादी

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राजस्थान के शिक्षा विभाग ने 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा और अहम बदलाव किया है, जो आने वाले समय में छात्रों के भविष्य को नई दिशा दे सकता है। अब राज्य के विद्यार्थी तीन ऐच्छिक विषयों के साथ एक चौथा ऐच्छिक विषय भी चुन सकेंगे। यह नई व्यवस्था केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तर्ज पर लागू की गई है, जहां यह विकल्प पहले से उपलब्ध है।

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य छात्रों को उनकी रुचि, क्षमता और भविष्य की योजनाओं के अनुसार विषय चुनने की अधिक स्वतंत्रता देना है। इससे छात्र न सिर्फ अपनी पसंद के विषयों में गहराई से पढ़ाई कर पाएंगे, बल्कि उनके लिए उच्च शिक्षा और करियर के नए अवसर भी खुलेंगे।

कैसे चुन सकेंगे चौथा ऐच्छिक विषय?

शिक्षा विभाग ने इस नई व्यवस्था के लिए कुछ स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं:

  • एक से अधिक संकाय वाले विद्यालय:
    ऐसे स्कूलों में छात्र अर्थशास्त्र, गणित, जीवविज्ञान या हिंदी जैसे विषयों में से चौथा ऐच्छिक विषय चुन सकते हैं, बशर्ते उस विषय के शिक्षक का पद स्वीकृत हो।
  • केवल विज्ञान संकाय वाले विद्यालय:
    यहां छात्र कंप्यूटर विज्ञान को चौथे ऐच्छिक विषय के रूप में चुन सकते हैं। इसके लिए कंप्यूटर अनुदेशक या वरिष्ठ अनुदेशक का होना जरूरी है। ऐसे विद्यालयों में अधिकतम दो चौथे ऐच्छिक विषय की अनुमति दी जा सकती है, जिसका अंतिम निर्णय संस्था प्रधान करेंगे।
  • एकल संकाय वाले विद्यालय:
    इन स्कूलों में छात्र शारीरिक शिक्षा को चौथे ऐच्छिक विषय के रूप में चुन सकते हैं, यदि संबंधित शिक्षक उपलब्ध हो।
  • कला और वाणिज्य संकाय:
    इन संकायों में छात्रों को अधिकतम एक अतिरिक्त विषय चुनने की अनुमति होगी, जिसका निर्णय भी संस्था प्रधान के स्तर पर होगा।

पुरानी व्यवस्था भी रहेगी जारी

इस बदलाव को लेकर छात्रों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। अगर कोई विद्यार्थी पुरानी व्यवस्था के अनुसार पढ़ाई जारी रखना चाहता है, तो वह ऐसा कर सकता है। पहले की तरह दो अनिवार्य और तीन ऐच्छिक विषयों का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।

क्यों है यह बदलाव खास?

यह कदम शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। इससे छात्र अपने करियर के हिसाब से बेहतर निर्णय ले पाएंगे और प्रतियोगी दौर में खुद को मजबूत बना सकेंगे।

कुल मिलाकर, राजस्थान का यह नया नियम छात्रों के लिए अवसरों के नए दरवाजे खोलने वाला साबित हो सकता है।

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