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पिता के अंतिम संस्कार में जाने के नहीं थे पैसे, माँ के साथ सड़क पर चूड़ियां बेचने वाला बेटा बना IAS, जानें रमेश की कहानी

UPSC Success Story: यूपीएससी की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों की संख्या में बच्चे यूपीएससी की परीक्षा देते हैं लेकिन इस परीक्षा को पास करना बेहद ही कठिन होता है।कोई ऐसे बच्चे हैं जो कठिन संघर्ष करके इस परीक्षा को पास कर दिखाते हैं।

यह कहानी महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव के रमेश घोलाप की है जिसने गरीबी और लाचारी को देखते हुए भी हार नहीं मानी और पोलियो जैसी बीमारी होते हुए भी यूपीएससी जैसे कठिन परीक्षा को पास कर दिखाया।

रमेश जब छोटे थे तभी उनके पैर में पोलियो की बीमारी हो गई। उनके आर्थिक स्थिति कमजोर थी और उनके पिता साइकिल के छोटे से दुकान चलाते थे। उनकी माँ चूड़ी बेचती थी और उनके घर में काफी गरीबी थी फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी।

पिता की मौत और 2 रुपये का सफर

रमेश ने 12वीं तक की पढ़ाई गांव में ही की थी. इसी दौरान उनके पिता का निधन हो गया. खबर मिलने पर वे तुरंत घर जाना चाहते थे, लेकिन जेब में 2 रुपये भी नहीं थे. बस का किराया देने तक के पैसे नहीं थे. उस वक्त उनके अंदर कुछ टूट गया, पर उसी दर्द ने उनके अंदर कुछ करने की आग जला दी।

मां बनीं सबसे बड़ी प्रेरणा

रमेश की मां चूड़ियां भेजती थी और रमेश ने भी ग्रेजुएशन के बाद गांव में पढ़ाना शुरू कर दिया। हालांकि वह कुछ बड़ा करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर दिखाई।

उधार लेकर शुरू हुई तैयारी

2010 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पायी। लगातार असफल होने के बाद भी वह हार नहीं मान रहे थे।

सपना हकीकत बन गया

कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद रमेश ने 2012 में UPSC परीक्षा पास कर ली. उन्हें 287वीं रैंक मिली और विकलांग कोटे में उनका चयन IAS ऑफिसर के रूप में हुआ।

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