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पूजा टोडासरा संगीत के साथ राजस्थानी संस्कृति को दे रही है बढ़ावा

दांतारामगढ़, [लिखा सिंह सैनी ] संगीत एक ऐसी विद्या है जो हृदय और मन के तार को झंकृत कर आनंद मग्न कर देती है। समस्त श्रृष्टि संगीतमय है, सृजन और संहार से लेकर हर जगह संगीत व्याप्त है। प्राचीन काल से अब तक संगीत अपने यथावत महिमा के साथ चलायमान है। इस क्षेत्र में अब बड़ा परिवर्तन आया है, अब लोग इसे सिर्फ मनोरंजन का साधन ही नहीं, बल्कि कैरियर का बेहतरीन ऑप्शन तथा समाज में इज्जत, नाम, सोहरत एवं पैसा कमाने का मुख्य साधन मानने लगे है। युवा पीढ़ी का संगीत की ओर काफी लगाव व झुकाव दिख रहा है। शेखावाटी के युवा संगीत में भी असीम संभावनाओं को तलाश रहे है। संगीत के क्षेत्र में सीकर जिले के फतेहपुर के गांव कल्याणपुरा की सिंगर व आर्टिस्ट पूजा टोडासरा की भी प्रतिभा निखरकर सामने आ रही है । जानकारी सूत्रों के अनुसार बचपन से ही गीत संगीत का शोक रखने वाली पूजा को एक समय गांव के ही जागरण में भजन नहीं गाने दिया ओर माइक छिनकर बोले की आपको‌ सुरों का भी ज्ञान नहीं है, उसी दिन से पूजा , संगीत में नाम रोशन करने के लिए प्रयास करने लगी । मेहनत रंग लाई और उन दिनों ही पूजा ने “पाणीड़ो बरसादे मारा राम रे” छनक- छनक बाजें घुघरा व तेजाजी के गाने गाये जो सफल रहें। पूजा के संगीत के गुरु सिंगर बल्ली मोहनवाड़ी ने भी पूजा को बहुत कुछ सीखाया और बहुत से गाने गंवाये जिसमें शुरू का गाना “कालों चटेलों रेशम को” काफी प्रसिद्ध रहा। इन दिनों पूजा बहुत से डीजे सोंग गाकर संगीत में नाम रोशन कर रही है। गीत संगीत के साथ पूजा राजस्थानी शेखावाटी की पहचान घाघरा, लुगड़ी को पहनकर ही ज्यादातर अपने गानों की प्रस्तुति देती जिससे हमारी राजस्थानी संस्कृति को भी बढ़ावा मिल रहा है। पूजा के सोशल मीडिया के फेसबुक पेज पर सवा दो लाख से ज्यादा फाॅलोवर्स है । पूजा के गाने सिंगर बल्ली मोहनवाड़ी के युट्युब पर आते है। संगीत के साथ पूजा पारिवारिक जिम्मेदारियां भी संभाल रही हैं इनके माता-पिता का निधन हो चुका है तथा इनके दो छोटे भाई हैं।

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