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70 दिनों तक सेवा करके भंडारे को पुर्णविराम दिया

मानव सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है

रतननगर(शंकर कटारिया) मानव सेवा से बढकर कोई धर्म नहीं है। भारतीय संस्कृति के इसी मूलमंत्र को रतननगर की पावन धार्मिक धरा पर चरितार्थ किया जा रहा है। श्री प्रयागनाथ आश्रम के महंत श्री शिवनाथ जी महाराज द्वारा वैश्विक कोरोना महामारी के इस संकटकाल में रतननगर के सामान्य जरुरतमंद परिवारों, आवारा गोवंश की सहायतार्थ लगातार राहत कार्य में संलग्न है और प्रतिदिन इनको भोजन उपलब्ध करवा रहे हैं। आज शिवनाथ जी महाराज ने सेवा संकल्प का समापन किया। उन्होंने लॉकडाउन शुरू होते ही भण्डारा चालु किया था। उन्होंने लगातार 40 दिनों तक आर्थिक रूप से कमजोर व जरुरतमन्द करीब 400 लोगों को भोजन प्रसाद का वितरण किया। उसके बाद बाबा प्रयागनाथ की समाधी पर भोग लगाकर गाय, मु्क जानवर कुत्ता आदि के लिए 30 दिनों तक खाने की व्यवस्था की गई इस प्रकार टोटल 70 दिनों तक सेवा करके भण्डारे को पुर्णविराम दिया गया।
इसके अलावा उन्होंने बाजार में आयुर्वेदिक क्वाथ पिलाया व मास्क भी बांटे। कोरोना महामारी की इस विषम परिस्थिति में जीवमात्र की सेवा के लिए किए जा रहे मानवीय पुण्य कार्य के लिए उन्हें कस्बे के विद्वजनों ने साधुवाद दिया। उल्लेखनीय है कि शिवनाथ जी की महाराज की जन्मभूमि रामगढ़ शेखावाटी हैं और पूर्व में वे छिंछास स्थित श्री नाथजी आश्रम में थे। संत समाज का इस प्रकार संकट के समय में आगे आकर सहायता करना सनातन संस्कृति के वसुधैव कुटुंबकम् के सिद्धांत का सामयिक प्रमाण है।

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