Hindi News / General News / महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह की जयंती और स्वतंत्रता सेनानी बीना दास की पुण्यतिथि मनाई

महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह की जयंती और स्वतंत्रता सेनानी बीना दास की पुण्यतिथि मनाई

आदर्श समाज समिति इंडिया के तत्वाधान में

सूरजगढ़, आदर्श समाज समिति इंडिया के तत्वाधान में लोहारू रोड़ सूरजगढ़ में एडवोकेट हजारीलाल सुनियां के नेतृत्व में दुश्मन के घर में घुसकर जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने वाले महान क्रांतिकारी अमर शहीद सरदार उधम सिंह की जयंती और देश की आजादी के लिए मात्र 21 वर्ष की उम्र में हथियार उठाने वाली क्रांतिकारी महिला स्वतंत्रता सेनानी बीना दास व “गाँधी स्मारक निधि” के प्रथम अध्यक्ष स्वतंत्रता सेनानी गोपीचंद भार्गव की पुण्यतिथि मनाई। शिक्षाविद् रामस्वरूप आसलवासिया ने बताया कि स्वाधीनता आंदोलन के समय 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग नरसंहार हुआ तो उधम सिंह ने अपनी आंखों से देखा था। उधम सिंह ने जलियांवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर हजारों निर्दोष भारतीयों की हत्या का बदला लेने की प्रतिज्ञा की, जिसे पूरा करने के लिए 21 साल बाद दुश्मन के घर विदेश जाकर भरी सभा में तत्कालीन पंजाब के गवर्नर माइकल ओ’ ड्वायर को गोलियों से भून दिया और माँ भारती आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया। यूँ तो देश भर में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल कैदियों द्वारा अंग्रेजों से माफी माँगे जाने या न माँगे जाने जैसी बहस तेजी से चल रही है। कोई कुछ भी कहे लेकिन ऐतिहासिक तथ्यों व साक्ष्यों को हम झुठला नहीं सकते। माफी माँगने का विकल्प तो उधम सिंह के पास भी था लेकिन भगत सिंह की तरह ही उन्होंने भी फाँसी के फंदे को ही चुना। आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गांधी ने स्वतंत्रता सेनानी बीना दास के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बीना दास भारत की महिला क्रांतिकारियों में से एक थीं। इनका रुझान प्रारम्भ से ही सार्वजनिक कार्यों की ओर रहा था।

‘पुण्याश्रम संस्था’ की स्थापना इन्होंने की थी, जो निराश्रित महिलाओं को आश्रय प्रदान करती थी। बीना दास का सम्पर्क ‘युगांतर दल’ के क्रांतिकारियों से हो गया था। एक दीक्षांत समारोह में इन्होंने अंग्रेज़ गवर्नर स्टनली जैक्सन पर गोली चलाई, लेकिन इस कार्य में गवर्नर बाल-बाल बच गया और बीना गिरफ़्तार कर ली गईं। क्रांतिकारी बीना दास को नौ साल की सजा हुई। 1937 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद महात्मा गांधी के सहयोग से कई राजबंदियों के साथ बीना दास को भी रिहा कर दिया गया। बीना दास ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया, जिसकी वजह से उन्हें तीन साल की जेल हुई। 1960 में उन्हें सामाजिक कार्यों में योगदान हेतु पद्म श्री से सम्मानित किया गया। बीना दास एक भारतीय क्रांतिकारी और राष्ट्रवादी जो कहलाई अग्निकन्या लेकिन गुमनामी के अंधेरे में हुई दुनिया से अलविदा। “गांधी स्मारक निधि” के प्रथम अध्यक्ष, संयुक्त पंजाब के प्रथम मुख्यमंत्री गाँधीवादी नेता, स्वतंत्रता सेनानी गोपीचंद भार्गव को भी उनकी पुण्यतिथि पर याद किया। क्रांतिकारी लेखक, समाजशास्त्री, स्वतंत्रता सेनानी और स्वामी विवेकानंद के छोटे भाई डॉ. भूपेंद्रनाथ दत्त को भी उनकी पुण्यतिथि पर नमन किया। इस मौके पर आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गांधी, रामेश्वर लाल लोवाड़िया, एडवोकेट हजारीलाल सुनियां, मास्टर रामस्वरूप आसलवासिया, अमित कुमार, सुनील गांधी, अंजू गांधी, दिनेश कुमार आदि अन्य लोग मौजूद रहे।

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