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कोरोना बंदी के कारण विद्यार्थियों के ख्वाब अधुरे

हजारों छात्र छात्राओं का भविष्य  नहीं बन पाया

दांतारामगढ़ (लिखा सिंह सैनी) वैश्र्विक कोरोना महामारी के कारणवंश हुई कोरोना बंदी में हजारों छात्र छात्राओं का भविष्य  नहीं बन पाया । मुस्फिली में भी अपने बच्चों को दांतारामगढ़ से पचास किलोमीटर सीकर में अच्छे कोचिंग संस्थानों में पढा़ये कराई ताकी बच्चे अपना भविष्य बना सकें । बीएड की पढ़ाई कर रही सुमन ने बताया की परिवार से शिक्षिका बनने का वादा किया था परिवारजनों को कैसे जैसे मनाकर घर से दुर आकर अच्छी पढाई की थी । इस बार ख्बाब पुरे होने के थे की कोरोना बंदी में सब अधुरा लग रहा है । एमकोम का एक्जाम दे चुकी मोनिका कुमावत ने बताया की सीकर जाकर कोचिंग की अच्छी तैयारी कर रही थी सरकारी जोब के लिए परन्तु कोरोना बंदी भी सब बीच में छुट गया कुछ समय के लिए  बन्द जो हैं वो जरूरी था देश हित के लिये । बहुत सारे ख्वाब थे   2020 में एक जोब मेरी भी हो अब कुछ एक्जाम हो गये और बाकी के रह गये परिणाम का भी नहीं पता अब नई  भर्ती कब आयेगी कोइ अता पता नहीं है। मेरे साथ के सब लोग पढ़ रहे है और हम सब ने ओनलाइन ग्रुप बना रखा है ,जिसमे रोज़ सवाल जवाब होते ओर पढाई चल रही है। आशा व उम्मीद है की हम कोरोना बंदी के बाद फिर सफल होगे या फिर अधुरे ख्वाब ही रह जायेगे ।

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