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बोरवेल संबंधी हादसों को रोकने के लिए दिशा-निर्देशों की पालना करें

जिला कलक्टर सिद्धार्थ सिहाग ने दिए निर्देश

चूरू, जिला कलक्टर सिद्धार्थ सिहाग ने बोरवेल, खुले ओपन वेल संबंधी हादसों से बचाव के लिए समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों की पालना करने तथा समुचित सतर्कता रखने के निर्देश जारी किए हैं। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि बच्चों के बोरवेल में गिरने जैसी घटनाओं के बाद अत्यधिक प्रयत्न करने पड़ते हैं तथा कानून व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होती है। ऎसी घटनाओं से बचाव के लिए यथासंभव प्रयास किए जाने चाहिए तथा विभिन्न समय पर जारी किए गए व्यवहारिक व तकनीकी सुझावों को जमीनी स्तर लागू किया जाना चाहिए।

दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक ग्राम पंचायत को खुले बोरवेलों का सर्वे कराना चाहिए तथा उन्हें तुरन्त बंद कराना चाहिए। खुले बोरवेल के संबंध में पटवारी, ग्रामसचिव तथा बीट कांस्टेबल आदि से समय-समय पर जानकारी ली जानी चाहिए। बोरवेल खोदने से पूर्व मशीन के ऑपरेटर को भू-स्वामी से यह शपथ पत्र लेना चाहिए कि बोरवेल काम नहीं आने पर उसे शीघ्र बंद करवा दिया जायेगा तथा इसकी सूचना क्षेत्र से संबंधित पटवारी, ग्रामसचिव, बीट कांस्टेबल, तहसीलदार, थानाधिकारी को दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति बोरवेल को खुला छोडता है, जिसमें हादसा हो सकता है, ऎसे बोरवेल मालिक को हादसे का जिम्मेदार मानकर उसके विरूद्ध कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए। इन गतिविधियों का प्रचार-प्रसार समाचार पत्रों के माध्यम से किया जाना चाहिए ताकि अन्य लोग ऎसा नही करें। गांवों में स्कूलों तथा अन्य राजकीय/गैर शासकीय तथा स्वयंसेवी सस्थाओं के माध्यम से खुले बोरवेलों से होने वाली दुर्घटनाओं/जनहानि के संबंध में जन-जागरुकता अभियान चलाया जाना चाहिए। खुले बोरवेलों को बंद करने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष गाईड लाईन्स बनाई जाकर उनका प्रचार-प्रसार करना चाहिए। सीवरेज लाइन/सोकपिट के कार्य के दौरान उस स्थान पर संकेतक बोर्ड, संकेतक चिन्ह, बैरिकेड आदि लगे हुए होने चाहिए। सीवरेज लाइन को खोदते समय यथासंभव उपकरणों की सहायता से कार्य किया जाना चाहिए। व्यक्ति विशेष के घुसने से पहले कैमरा आदि से पाईप की स्थिति व रुकावट जांच लें। सीवरेज लाइन जर्जर अवस्था में हो तो उसके अन्दर नही जाएं। चॉक पाईप से 20 फीट आगे बड़ा हॉल करके तकनीकी सहायता से रुकावट दूर की जानी चाहिए। सीवरेज लाईन को बिना नगर निकाय की अनुमति के नहीं खोला जाना चाहिए। मरम्मत के दौरान हाईटेक मशीनों को उपयोग में लेना चाहिए। सीवरेज लाइन का समय-समय पर निरीक्षण किया जाना चाहिए। सीवरेज लाइन को ठीक करने हेतु विशेष प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्तियों को ही नियाजित किया जाए। सीवरेज की मरम्मत के दौरान प्राथमिक उपचार, चिकित्सा दल, एम्बुलैंस आदि की व्यवस्था मौके पर उपलब्ध रखी जाए। नवीन कुआं खोदने से पूर्व प्रशासन द्वारा स्थान का सर्वे कर अनुमति दी जानी चाहिए। कुआ खोदने से सम्बन्धित सावधानियों की गाईड लाईन्स बनाई जानी चाहिए। कुआ खोदते समय पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेन्ट) का प्रयोग करना चाहिए। नये कुए खोदते समय जहां तक बालू मिट्टी या कच्ची मिट्टी हो, वहां तक कंक्रीट अथवा पत्थर की चुनाई की जानी चाहिए एवं चुनाई सूखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। अगर कहीं मिट्टी खिसकने का अन्देशा हो तो उस स्थान को शोरिंग की मदद से स्थिर करना चाहिए। नवीन कुएं से पत्थर निकालते समय सभी व्यक्तियों को हेलमेट प्रयोग करना चाहिए। पुराने अथवा जीर्ण-शीर्ण कुंंओं की मरम्मत के दौरान भी सावधानी आवश्यक है। ऎसे कुओं को पूर्व में चिन्हित किया जाना चाहिए। पुराने कुएं की मरम्मत से पूर्व स्थानीय प्रशासन से अनुमति ली जाए। पुराने अथवा जर्जर कुंआें पर लोहे का जाल लगाया जाना चाहिए। कुएं के अन्दर जाने से पूर्व जहरीली गैस का पता लगाया जाना चाहिए। कुंओं की मरम्मत दक्ष व्यक्तियों से ही करानी चाहिए। खनन के दौरान चट्टान अथवा मिट्टी खिसकने से होने वाली घटनाओं से बचाव के लिए सम्भावित स्थानों को चन्हित किया जाना चाहिए। चट्टान खिसकने की सम्भावना होने पर लोहे की जाली आदि का प्रयोग किया जाना चाहिए। अत्यधिक वर्षा के समय सड़क के किनारे यदि चट्टान आदि खिसकने की घटना होने की आशंका हो तो रूट डायवर्ट की सुविधा होनी चाहिए। खनन के दौरान विस्फोट से पूर्व सभी लोगों को सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए। खनन के दौरान बड़े पत्थरों को सुरक्षित तरीके से अलग किया जाना चाहिए। कच्ची मिट्टी खिसकने वाले स्थान पर पक्की दीवार का निर्माण किया जाना चाहिए। खनन के दौरान सुरक्षा से संबंधित गाईड लाईन की पालना की जानी चाहिए।

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