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हॉकी की नर्सरी बना खेतड़ी तहसील का रंवा गांव

अध्यापक की लगन से 14 नेशनल व 80 विद्यार्थी खेल चुके राज्यस्तर पर

हर रोज अध्यापक उमेश स्वामी तहसील के बच्चों को निशुल्क सिखा रहे हॉकी

खेतड़ी(नरेंद्र स्वामी) गांवो की स्कूलों में छात्र-छात्राएं अक्सर फुटबॉल, कबड्डी, वॉलीबाल खेलने में रुचि दिखाते हैं। लेकिन खेतड़ी पंचायत समिति का रंवा गांव हॉकी में राजस्थान का मिनी पंजाब कहलाता है। पिछले 13 साल में हॉकी में पाई उपलब्धि के बदौलत नेशनल व राज्य स्तर के खिलाड़ी निखर कर आने से आज पंचायत स्तर का गांव रंवा हॉकी की नर्सरी बन गया है। गांव का नाम हॉकी के खेल में राजस्थान स्तर पर सुनहरे अक्षरों में लिखा हुआ है। यह सब कायापलट 2007 में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में उमेश कुमार स्वामी पीटीआई बन कर आने के बाद हुई। उन्होंने आते ही राष्ट्रीय खेल हॉकी को बच्चों को सिखाना शुरू किया और बच्चों के साथ स्वंय ने भी जमकर मेहनत की। जिसका परिणाम उसी साल जिला स्तर पर हॉकी में रंवा की टीम ने विजेता बनकर दिया तथा राज्य स्तर पर झुंझुनू जिले की टीम बन कर प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद तो छात्र-छात्राओं में ऐसा जुनून पैदा हुआ कि 2019 तक आते-आते रंवा गांव हॉकी की नर्सरी बन गया। 14 खिलाड़ी नेशनल तक खेल चुके हैं जिनमें से दो छात्राएं हैं। राज्य स्तर पर लगभग 80 छात्र-छात्राएं खेल चुके हैं। 2010 व 2011 में 2 साल लगातार राज्य स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता में उपविजेता भी रही है। गांव के बच्चों में हॉकी के प्रति ऐसा जुनून पैदा हो रहा है सुबह व शाम को छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में भी हॉकी की स्टिक रहती है। उस समय ऐसा दृश्य होता है जैसे कोई पंजाब के गांव का कोई मैदान हो। गांव के बच्चें अभ्यास करते रहते हैं। पीटीआई उमेश कुमार भी हॉकी में ऐसे समर्पित हुए कि खिलाडिय़ों को निखारने में कमी नहीं छोड़ रहे। तहसील के बच्चों को निशुल्क सिखा ही रहे है साथ ही छुट्टी के दिन व स्कूल छुट्टी के बाद शाम को देर तक छात्र-छात्राओं को हॉकी के गुर देते रहते हैं।
भामाशाहो व जनप्रतिनिधियों का भी रहा सहयोग
पीटीआई उमेश कुमार को हॉकी की टीम बनाने की जिद तो थी लेकिन मैदान उबड़ खाबड़ व खेल का सामान पास में नहीं था और ना ही स्वंय के खर्चे से इन सब की व्यवस्था करने का साधान। पीटीआई की गांव के बच्चों को हॉकी सिखाने की लगन को देख सरपंच रेखा जेवरिया, पूर्व सरपंच ठाकुर सिंह, मोहर सिंह, रामनिवास ने भामाशाह बनकर कर मैदान का समतलीकरण करवाया। तथा खेल का सामान भी उपलब्ध करवाया। जब बच्चे चप्पलों में व बिना जूतों के खेल कर विजेता बन रहे थे तो पंचायत समिति प्रधान मनीषा गुर्जर ने भी खिलाडिय़ों को अपनी तरफ से स्पोट्र्स शूज प्रदान किए थे।
नेशनल में इन खिलाडिय़ों ने पाई उपलब्धि
रंवा गांव के गुदड़ी के लालों ने मिट्टी के मैदान पर व नंगे पांव तथा पैरों में चप्पलो में खेलकर नेशनल तक छाप छोड़ रखी है। आज भी स्कूली शिक्षा के दौरान हॉकी खिलाडिय़ों का नाम आता है तो झुंझुनूं जिला ही नही अपितु पूरे राजस्थान में रंवा गांव का नाम सबसे पहले लिया जाता है। रंवा स्कूल से छात्रा ममता कुमारी, पूजा कुमारी, छात्र विक्रम, कपिल, मनजीत, भूप सिंह, पवन कुमार, पुष्पेंद्र सिंह, हरीश मीणा, मोहित कुमार, अजय, सरजीत, रवि दत्त व दीपक ने नेशनल तक खेल कर खेतड़ी तहसील का नाम रोशन किया है।
पीटीआई व हॉकी टीम हो चुकी है सम्मानित
रंवा गांव में हॉकी को बुलंदियों पर पहुंचाने वाले पीटीआई उमेश कुमार स्वामी अपनी इस काबिलिय के लिए कई दफा सम्मानित हो चुके है। उपखण्ड स्तर पर 2009 व 2016 में सम्मानित हुए। वहीं 2011 में पायका खेलकूद प्रतियोगिता में रंवा गांव की टीम जिला स्तर पर विजेता होने पर तत्कालीन कलेक्टर मुग्धा सिन्हा ने टीम का सम्मान किया था।
रंवा गांव में हॉकी एकेडमी खोलने की उठ रही है मांग
रंवा गांव के छात्र-छात्राओं द्वारा पाई उपलब्धियों के बाद सरकार से हॉकी की एकेडमी खोलने की मांग उठ रही है। समाजसेवी शिवकुमार जेवरिया, प्रिंसिपल वीरेंद्र सिंह यादव व सुरेंद्र सिंह ने विधायक डॉ जितेंद्र सिंह व सरकार से मांग की है कि रंवा में हॉकी की एकेडमी खोली जाए। जिससे आसपास के गांवों के ही खिलाड़ी नहीं बल्कि जिले के भी खिलाडिय़ों को फायदा मिलेगा। हॉकी के खिलाड़ी एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदुस्तान व राजस्थान का नाम ऊंचा कर सकें। पूर्व प्रधान मदन लाल गुर्जर ने बताया कि रंवा गांव के आसपास गांवों में हॉकी की प्रतिभाएं बहुत है बशर्ते उनको तराशने की जरूरत है तथा सरकार द्वारा संसाधन उपलब्ध करवाए जाएं।

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