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नरेगा में रोजगार देने में नाकाम रहे अधिकारियों व कर्मचारियों पर गिरी गाज

लोगों की मांग के अनुसार काम देने में रुचि नही लेने वाले 18 अधिकारी पर

झुंझुनूं, महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत जरूरत मंद लोगों को रोजगार देने, कमजोर तबके के लिये उनके निजी खेतों में कार्यों की स्वीकृति के प्रस्ताव तैयार करने, समय पर भुगतान दिलवाने में नाकाम रहे नरेगा कर्मियों की शिथिलता अब उन्हें भारी पड़ रही हैं। लोगों की मांग के अनुसार काम देने में रुचि नही लेने वाले 18 अधिकारी, कर्मचारियों के विरुद्ध जिला कार्यक्रम समन्वयक तथा जिला कलेक्टर द्वारा पेनल्टी तथा अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई है। नरेगा के अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक तथा सीईओ द्वारा बताया गया कि रोजगार हेतु आवेदन करने पर आवेदकों को दिनांकित रसीद नही देने, जॉबकार्ड की संख्या तथा काम की मांग के अनुसार कार्यो के प्रस्ताव तैयार नहीं करने, कार्यों का समय पर जिओ टैग्गिंग नही करने तथा कार्यों का निरीक्षण नही करने पर उदयपुरवाटी, खेतड़ी, नवलगढ़, सूरजगढ़, झुंझुनूं तथा चिड़ावा के विकास अधिकारियों पर एक से अधिक बार 1000 -1000 रुपये की पेनल्टी आरोपित की गई है तथा उदयपुरवाटी के कार्यवाहक विकास अधिकारी सहित 12 ग्राम विकास अधिकारियों के विरुद्ध 17 सीसीए के आरोप पत्र जारी किये गये है। कार्यों के तकमीने तैयार करने में अरुचि दर्शाने वाले 16 कनिष्ठ तकनीकी सहायकों की संविदा सेवा समाप्ति के नोटिस जारी कर उनके स्थान पर गत पांच साल से लगातार सेवाएं दे रहे मेटों को बेयर फुट इंजीनियर के रूप में तैयार करने के लिये पैनल तैयार किया जा रहा है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामनिवास जाट ने बताया कि काम मांगने पर 15 दिन के भीतर काम नही मिलने पर प्रत्येक आवेदक को प्रतिदिन 55 रुपये घर बैठे बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि जिले में 77 हजार सक्रिय जॉबकार्ड धारक होने के बावजूद नरेगा कर्मियों की अरुचि के चलते गत पांच सालों के दौरान कभी भी प्रतिदिन 23 हजार से ज्यादा श्रमिक काम पर नहीं लगाये गए । जबकि इस बार गत एक माह से लगातार प्रतिदिन 35 से 40 हजार श्रमिकों को नरेगा कार्यों पर नियोजित किया गया है। राज्य सरकार की मंशा है कि प्रत्येक जॉबकार्ड धारक को काम का प्रस्ताव दिया जाकर जलसंग्रहण तथा वृक्षारोपण के कार्यों के साथ स्थायी एवं जनोपयोगी परिसंपत्तियों का सृजन हो।

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